Begusarai News : कला एवं संस्कृति विभाग, बेगूसराय तथा सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) सह बीपी इंटर स्कूल, बेगूसराय के संयुक्त तत्वावधान में सुरभि रूरल डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित नौ दिवसीय 'रंग अंकुर' बाल अभिनय कार्यशाला का शुक्रवार को गरिमापूर्ण वातावरण में समापन हुआ. 23 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में अभिनय क्षमता, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति, रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना था.
बच्चों ने नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां
समापन समारोह में प्रशिक्षित बच्चों ने गायन, कविता-पाठ और सामाजिक सरोकारों पर आधारित शिक्षाप्रद नाटक 'दोहरे नियम' का प्रभावशाली मंचन किया. बच्चों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद-अभिव्यक्ति और कविता वाचन के माध्यम से स्त्री सम्मान, समानता और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया.
कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद
समारोह में प्रख्यात इतिहासकार भगवान प्रसाद सिन्हा, शिक्षाविद् हरिशंकर सिंह, समाजसेवी दिलीप कुमार सिन्हा, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार साहनी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित अभिनेत्री खुशबू कुमारी, वतन कुमार, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित अभिनेता एवं निर्देशक तथा कार्यशाला प्रशिक्षक हरीश हरिऔध और विद्यालय की प्राचार्या कामनी कुमारी मंचासीन रहीं. कार्यक्रम का संचालन दीपक कुमार ने किया.
अभिनय कार्यशालाएं व्यक्तित्व विकास में सहायक: प्राचार्या
विद्यालय की प्राचार्या कामनी कुमारी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान किया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अभिनय कार्यशालाएं बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उन्होंने भविष्य में भी प्रतिवर्ष ऐसी व्यवस्थित और प्रस्तुति आधारित कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रंगमंच बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, संवाद कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करता है.
कला शिक्षा को बताया व्यक्तित्व विकास का आधार
इतिहासकार भगवान प्रसाद सिन्हा ने कहा कि कला शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व विकास का सशक्त आधार है. अभिनय और सांस्कृतिक गतिविधियां जीवन में संवेदनशीलता, अनुशासन तथा अभिव्यक्ति को समृद्ध बनाती हैं. वहीं शिक्षाविद् हरिशंकर सिंह ने अभिनेता एवं निर्देशक हरीश हरिऔध के रंगमंचीय संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया. उन्होंने कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार साहनी द्वारा जिले में रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन की भी प्रशंसा की.
रंगमंच बच्चों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम
समाजसेवी दिलीप कुमार सिन्हा ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी साधन भी है. कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार साहनी ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि रंगमंच बच्चों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है. उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला में तैयार नाट्य प्रस्तुति को जिले के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.
नौ दिनों तक मिला अभिनय का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला प्रशिक्षक हरीश हरिऔध ने बताया कि नौ दिनों के प्रशिक्षण में बच्चों ने अभिनय, वाणी, शारीरिक अभिव्यक्ति, मंच अनुशासन, समूह कार्य, कविता वाचन और नाट्य प्रस्तुति की विभिन्न विधाओं का गंभीरतापूर्वक अभ्यास किया. उन्होंने कहा कि बच्चों की सीखने की जिज्ञासा और समर्पण इस कार्यशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि रही. कार्यशाला में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित रंगकर्मी अमरेश कुमार अमन ने भी प्रशिक्षक के रूप में अभिनय प्रशिक्षण दिया. वहीं कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार साहनी ने बच्चों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित कर रंगमंच, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक मूल्यों पर मार्गदर्शन दिया.
प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय की संगीत शिक्षिका मीनाक्षी शंकर, संगीत शिक्षक अवधेश पासवान, सुरभि रूरल डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसाइटी के कलाकार अशोक, मनीष, पंकज, कुणाल भारती तथा संस्था के सचिव अजय कुमार भारती सहित सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. समापन समारोह के अंत में सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए. इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं, कला प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे.
