27 लाख 62 हजार रुपये खर्च कर 5022 टन कचरा का निगम करेगा निष्पादन

नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 90 टन कचरा निकलता है. उन कचरों को डंप करने उसका प्रबंधन करने के लिए कोई स्थायी स्थल नहीं है.

बेगूसराय. नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 90 टन कचरा निकलता है. उन कचरों को डंप करने उसका प्रबंधन करने के लिए कोई स्थायी स्थल नहीं है. इसका परिणामस्वरूप कचरों को इ कभी इस स्थल पर तो कभी उस स्थल पर कचरों को डंप करना पड़ रहा है. गुप्ता लखमिनियां बांध किनारे खुले में कचरा फेंकना पड़ रहा है. इस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. अब वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट के उठाव को लेकर अहम पहल की जा रही है. नगर निगम द्वारा लगभग 27 लाख 62 हजार रुपये खर्च कर 5022 टन कचरा के निष्पादन के लिए एक एजेंसी का चयन किया गया है. इसके साथ कचरा उठाव और जैव उपचार का इकरारनामा किया गया है. शीघ्र योजना का शिलान्यास कर एजेंसी कार्य आरंभ कर देगी. इससे लोगों को बहुत राहत मिल सकती है. विदित हो कि लखमिनियां बांध के किनारे खुले में फेंकें गए कचरा से आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था. कचरे से दुर्गंध, मच्छर -मक्खियों का प्रकोप व जहरीले रिसाव के कारण की संक्रामक लोगों का खतरा भी बना हुआ था. साथ ही बारिश के मौसम में कचरे से निकलने वाले गंदा पानी का खेतों व जलस्त्रोतों तक पहुंचने की भी खतरा सता रहा था, जिससे खेती और पेयजल पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता था.

जैव उपचार से अलग किये गये घटकों का होगा बेहतर उपयोग

बताया जाता है कि चयनित एजेंसी द्वारा उक्त स्थल पर ही कचरे का जैव उपचार किया जायेगा. कचरे से विभिन्न तत्वों को अलग-अलग कर उनका निर्धारित मानकों के अनुसार उपयोग किया सकता है. कचरे से बैट्री, ई-वेस्ट व मेडिकल अवशेष जैसे खतरनाक कचरे का निस्तारण अधिकृत केंद्रों में किया जाना है. वहीं लोह-अलौह धातु, कांच व हार्ड प्लास्टिक जैसे पुनर्चक्रण योग्य अंश को अधिकृत रीसाइक्लर को भेजा जायेगा. कचरा से निकलने वाले ज्वलनशील अंश जैसे प्लास्टिक पाॅलीथीन, कागज व कपड़ा से आरडीएफ तैयार कर सीमेंट संयंत्र व वेस्ट -टू-एनर्जी संयंत्रों को ईंधन के रूप में आपूर्ति की जा सकती है. इसके साथ ही रेत, मिट्टी, ईंट व मलबा जैसे निष्क्रिय वस्तुओं का उपयोग सड़क निर्माण, गड्ढे का भराव कार्य व अन्य कार्यों में उपयोग किया जायेगा. वहीं पूरी तरह से बड़े गले कचरे से निकलने वाले मिट्टी जैसे महीन अंश का उपयोग जांच के बाद भूमि उर्वरा सुधार व हरित क्षेत्र विकसित करने में होगा.

कचरा प्रबंधन के लिए लीज पर जमीन लेगा नगर निगम

एक ओर जहां वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट के उठाव को लेकर एजेंसी हायर की गयी है.वहीं निगम द्वारा कचरा डंप के लिए स्थाई भूमि के लिए भी नये सिरे से प्रयास तेज कर दिया गया है. बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को डंप करने की समस्या से लंबे समय से जूझ रही है.पूर्व में एनएच-31 के किनारे जेल गेट के निकट कचरा डंप किया जा रहा था और भूमि की तालाश भी जारी थी.इसी दौरान बिहार सरकार द्वारा मल्हीपुर में कचरा डंपिग के लिए भूमि प्रस्तावित भी की गयी थी.बाद में जब उक्त भूमि का जब भौतिक सत्यापन हुआ तो विभिन्न कारणों से कचरा डंपिग के उक्त स्थल भी उपयुक्त नहीं था. विभागीय सूत्रों के अनुसार अब नगर निगम द्वारा कचरा प्रबंधन हेतु 5 एकड़ भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हेतु सतत लिज़ के लिए ईओआइ का प्रकाशन भी किया गया है. भूमि की उपलब्धता हो जाने के बाद कचरा प्रबंधन सुगम हो जाएगा और लोगों की परेशानी का स्थाई हल हो सकेगा.

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By MANISH KUMAR

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