Begusarai News : सदी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर रंगसृजन आर्ट एंड सोशल एसोसिएशन की ओर से रंगसृजन स्पेस में प्रसिद्ध कहानी 'सद्गति' पर आधारित नाटक का मंचन किया गया. मुंशी प्रेमचंद की यथार्थवादी कहानी का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन मोहित मोहन ने किया. नाटक के माध्यम से भारतीय समाज में व्याप्त जाति-भेद, छुआछूत, शोषण और सामाजिक पाखंड का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया.
दुखी चमार की कहानी ने झकझोरा
नाटक की कहानी के केंद्र में दुखी चमार का चरित्र है, जो अपनी बेटी के विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निकलवाने पंडित घासीराम के घर पहुंचता है. पंडित बिना दक्षिणा लिए मुहूर्त निकालने को तैयार नहीं होता और दुखी से दिनभर लकड़ी चिरवाने, आंगन साफ कराने सहित कई कठोर काम करवाता है. भूख-प्यास और अत्यधिक मेहनत के कारण दुखी की वहीं मृत्यु हो जाती है.
सामाजिक पाखंड पर उठाए गए सवाल
दुखी की मृत्यु के बाद गांव के लोग और पंडित उसकी लाश को छूने से भी कतराते हैं, क्योंकि वह दलित होता है. अंत में पंडित रस्सी से बांधकर उसकी लाश को गांव से बाहर घसीटते हुए फेंक देता है. नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि धर्म के नाम पर किसी का शोषण करना अधर्म है. साथ ही छुआछूत और ऊंच-नीच जैसी सामाजिक कुरीतियों पर तीखा सवाल उठाते हुए समाज को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया गया.
कलाकारों के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
नाटक में पंडित की भूमिका अमन शर्मा, पंडित की पत्नी की भूमिका कशिश कुमारी, दुखी की भूमिका नवीन कुमार, दुखी की पत्नी की भूमिका रिया कुमारी, दुखी की बेटी की भूमिका चेतना कुमारी तथा गोंड़ की भूमिका बादल कुमार ने निभाई. सभी कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा. नाटक का पार्श्व संगीत सचिन कुमार ने दिया. विधि व्यवस्था की जिम्मेदारी रितेश कुमार और विकास कुमार ने संभाली. मंच संचालन याशना भूषण और सृजन सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया.
वरिष्ठ रंगकर्मियों ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन जिले के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं फिल्मकार अनिल पतंग, वरिष्ठ रंगकर्मी अवधेश, रंगकर्मी विजय सिन्हा, रंगकर्मी हरिश हरिऔध तथा समाजसेवी अशोक सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में रंगकर्मी, साहित्य प्रेमी और दर्शक उपस्थित रहे.
