बंद दुकान से 3800 डीएपी खाद की बोरियों की बिक्री पर किसानों ने उठाये सवाल

कृषि क्षेत्र में खाद आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरी निगरानी प्रणाली और वितरण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.

तेघड़ा. कृषि क्षेत्र में खाद आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरी निगरानी प्रणाली और वितरण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. जानकारी के अनुसार, पिढौली पंचायत के खुदरा खाद विक्रेता की दस दिनों से बंद पड़ी दुकान से ( 01 अप्रैल से 10 अप्रैल तक) 3882 बोरियां डीएपी व 1018 बोरी यूरिया खाद की बिक्री दर्ज की गयी है, जिससे कालाबाजारी और अनियमित वितरण की आशंका गहरायी है. हैरानी की बात यह है कि यह दुकान पिढ़ौली दियारा क्षेत्र में स्थित है, जहां आने-जाने का समुचित रास्ता तक उपलब्ध नहीं है. ऐसे स्थान से इतनी बड़ी मात्रा में खाद की बिक्री अपने आप में संदेह की स्थिति पैदा कर रहा है. स्थानीय किसानों का कहना है बीते रबी मौसम में डीएपी खाद बाजार से लगभग गायब हो गयी थी. उस समय किसानों को मजबूरी में महंगे दर पर एनपीके खाद का उपयोग कर गेहूं ,मक्का, आलू, सरसों आदि दलहन तिलहन की बुवाई करनी पड़ी, जिससे उनकी लागत बढ़ गयी और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ा. अब जब इस मौसम में खाद की वास्तविक मांग अपेक्षाकृत कम बतायी जा रही है, उसी दौरान इतनी बड़ी मात्रा में डीएपी और यूरिया की बिक्री दर्ज होना कालाबाजारी नहीं तो और क्या है. जानकारों के अनुसार पोस मशीन के माध्यम से बिक्री दर्शाकर अनियमित तरीके से खाद के लेन-देन की आशंका है. इससे निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी अनियमितता कैसे अनदेखी रह गयी. इसी बीच किसान नेता जुलुम सिंह, दिनेश सिंह, अशोक प्रसाद सिंह ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए डीएम बेगूसराय से पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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By Manish kumar

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