Begusarai News : बेगूसराय में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने शिक्षक समानुपातीकरण एवं स्थानांतरण से संबंधित आदेश में कई विसंगतियां बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि त्रुटिपूर्ण स्थानांतरण आदेश किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है. इस संबंध में उन्होंने शिक्षामंत्री और शिक्षा विभाग का ध्यान आकृष्ट करते हुए विसंगतियों को दूर करने की मांग की है.
अधिशेष घोषित करने में मनमानी का आरोप
डॉ. राय ने कहा कि पांच वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों की श्रेणी में वरीयतम शिक्षक के स्थान पर उसके बाद वाले शिक्षक को अधिशेष (सरप्लस) घोषित किया गया है. वहीं प्रतिस्थापित शिक्षकों को भी अधिशेष घोषित करना नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है. उन्होंने आरोप लगाया कि पांच वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों की श्रेणी में भी अंतिम योगदानकर्ता के बजाय उससे पहले योगदान देने वाले शिक्षकों को अधिशेष घोषित किया गया है.
रिक्त पदों और विषयवार व्यवस्था पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में किसी विषय के केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं, फिर भी उन्हें अधिशेष घोषित कर दिया गया है. पोर्टल पर केवल राजकीयकृत एवं परियोजना विद्यालयों के रिक्त पद दिखाए जा रहे हैं, जबकि उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालयों के रिक्त पद भी शामिल किए जाने चाहिए. डॉ. राय ने कहा कि संस्कृत, मैथिली और उर्दू विषयों में विद्यार्थी रहने के बावजूद संबंधित शिक्षकों को भी अधिशेष घोषित किया गया है. संगीत, नृत्य और ललित कला के शिक्षकों के साथ भी अन्याय हुआ है.
प्रोन्नति के बाद होनी चाहिए थी प्रक्रिया
डॉ. राय ने कहा कि पूर्व में जारी प्रोन्नति संबंधी आदेश का अब तक पालन नहीं हुआ है. यदि पहले शिक्षकों को प्रोन्नति देकर उसके बाद समानुपातीकरण और स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाती, तो वर्तमान जैसी अव्यवस्था नहीं होती. उन्होंने कहा कि सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) में स्थानांतरण नहीं करने का विभागीय आदेश होने के बावजूद कई ऐसे विद्यालयों में भी सरप्लस दिखाया गया है. पीएम श्री विद्यालयों के रिक्त पद भी पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं किए गए हैं, जिससे वहां रिक्त पदों पर शिक्षकों का समायोजन प्रभावित होगा.
सकारात्मक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो न्यायालय जाएंगे शिक्षक
डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने शिक्षामंत्री को संबोधित पत्र में कहा है कि विसंगतियों से भरी समानुपातीकरण प्रक्रिया के कारण प्रदेश के अधिकांश शिक्षक चिंता और तनाव में हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सक्षम प्राधिकार ने सकारात्मक हस्तक्षेप कर त्रुटियों का समाधान नहीं किया, तो शिक्षक न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे. इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी.
