सिमरिया गंगा घाट में डूबी महिला का 36 घंटे बाद भी नहीं मिला शव, परिजनों की आंखें पथराईं, प्रशासन पर उठे सवाल

Begusarai News: बेगूसराय के सिमरिया गंगा घाट पर श्राद्ध कर्म के बाद स्नान करने के दौरान डूबी दरभंगा की मन्नु देवी का शव 36 घंटे बीत जाने के बाद भी बरामद नहीं हो सका है. रविवार को पूरे दिन चला एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों का सर्च अभियान विफल रहा.

Begusarai News: (बिपिन राज की रिपोर्ट) बेगूसराय जिले के बरौनी प्रखंड अंतर्गत प्रसिद्ध सिमरिया गंगा घाट पर शनिवार को हुए दर्दनाक हादसे के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी लापता महिला का शव बरामद नहीं किया जा सका है. ज्यों-ज्यों समय बीतता जा रहा है, सिमरिया घाट पर कैंप कर रहे एसडीआरएफ के जवानों, स्थानीय गोताखोरों और पीड़ित परिजनों के चेहरे पर नाउम्मीद और मायूसी का भाव गहराता जा रहा है.

शनिवार की सुबह दरभंगा जिले से एक परिवार अपने घर में आयोजित श्राद्ध कार्यक्रम के समापन के बाद गंगा स्नान करने और पवित्र गंगाजल लेने सिमरिया घाट आया था. नहाने के क्रम में गहरे पानी का अंदाजा न मिलने के कारण दरभंगा निवासी 15 वर्षीय मुस्कान कुमारी और उसकी भाभी 24 वर्षीय मन्नु देवी एक साथ तेज धार में डूब गईं. घटना के बाद मचे कोहराम के बीच स्थानीय गोताखोरों ने करीब तीन-चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ननद मुस्कान कुमारी का शव तो पानी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन भाभी मन्नु देवी का कोई सुराग नहीं मिल सका.

दूसरे दिन भी चला सघन सर्च अभियान, टकटकी लगाए बैठे रहे परिजन

मन्नु देवी के शव की तलाश में रविवार की सुबह से ही सर्च अभियान का दूसरा चरण शुरू किया गया. मृतका के रोते-बिलखते परिजन किसी चमत्कार की उम्मीद में भोर से ही सिमरिया गंगा घाट पर डटे रहे. परिजनों ने खुद भी नावों के जरिए घाट-घाट जाकर खोजने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी.

इसके बाद स्थानीय गोताखोर अनिल कुमार व जाटो कुमार और एसडीआरएफ टीम के राजभूषण, लोहा सिंह व शशिभूषण शर्मा के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू बोट के साथ गंगा की मुख्य धारा में पूरे दिन सघन सर्च अभियान चलाया गया. गोताखोरों ने पानी के नीचे काफी दूर तक खोजबीन की, लेकिन अथक प्रयासों के बावजूद समाचार प्रेषण तक शव को बरामद नहीं किया जा सका था. गंगा तट पर बैठे परिजनों के आंसू अब सूख चुके हैं और अपनी बहू को आखिरी बार बस एक झलक देख लेने की उनकी ख्वाहिश अधूरी है. इधर, शनिवार को बरामद हुई मुस्कान कुमारी के शव का रविवार को परिजनों द्वारा भारी मन से सिमरिया घाट पर ही अंतिम संस्कार कर दिया गया.

प्रशासन पर फूटा गुस्सा, सांत्वना देने भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी

इस बेहद दुखद और संवेदनशील घटनाक्रम के बीच जिला प्रशासन और स्थानीय अंचल प्रशासन के अधिकारियों की बड़ी संवेदनहीनता सामने आई है. गंगा में एक साथ दो लोगों के डूबने और एक शव के लापता होने जैसी बड़ी घटना के बावजूद प्रशासनिक अमले का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सिमरिया घाट पहुंचने की जहमत नहीं उठाई. सुदूर दरभंगा जिले से आए पीड़ित और बदहवास परिजनों से मिलकर किसी ने ढांढस बंधाना या उनका दुख-दर्द बांटना भी मुनासिब नहीं समझा. प्रशासन के इस उदासीन रवैये को लेकर सिमरिया घाट पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों, तीर्थ पुरोहितों और ग्रामीणों में भी गहरा आक्रोश देखा जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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