Half-yearly Assessment: जिले में बाढ़ का असर अब बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा पर भी पड़ने लगा है. गंगा के उफान के कारण जिले के आठ प्रखंडों के 147 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. वहीं 22 अन्य विद्यालयों में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है. ऐसे में कुल 169 विद्यालयों में मंगलवार से शुरू होने वाली अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन संभव नहीं है. इन विद्यालयों में पढ़ने वाले 40 हजार से अधिक बच्चे निर्धारित तिथि पर परीक्षा नहीं दे पाएंगे.
जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की पूरी रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक को भेज दी गयी है. बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन विद्यालयों में फिलहाल परीक्षा नहीं करायी जाएगी. जिन विद्यालयों में बाढ़ का पानी नहीं है और परीक्षा संचालन की स्थिति सामान्य है, वहां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा होगी.
आठ प्रखंडों के 169 विद्यालय प्रभावित
बाढ़ से सबसे अधिक विद्यालय बछवाड़ा, मटिहानी, बलिया और शाम्हो प्रखंड में प्रभावित हुए हैं. बछवाड़ा में 45, मटिहानी में 30, बलिया में 27 और शाम्हो में 19 विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं. इसके अलावा तेघड़ा में 11, साहेबपुर कमाल में सात, बेगूसराय सदर में छह और बरौनी में दो विद्यालयों में पानी जमा है अथवा विद्यालय भवन और आवागमन की स्थिति परीक्षा संचालन के अनुकूल नहीं है.
इन विद्यालयों में पहुंचने वाले रास्ते भी पानी में डूबे हुए हैं. ऐसे में बच्चों को परीक्षा के लिए स्कूल तक बुलाना जोखिम भरा माना गया है.
22 विद्यालयों में चल रहे राहत शिविर
बाढ़ प्रभावित 22 विद्यालयों को फिलहाल राहत केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. यहां बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए आश्रय स्थल के साथ सामुदायिक रसोई भी संचालित हो रही है. बड़ी संख्या में लोगों के विद्यालय भवन में रहने के कारण इन स्कूलों में परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है.
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल बाढ़ पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान, भोजन और जरूरी राहत उपलब्ध कराना है.
15 सितंबर से शुरू होनी थी परीक्षा
बिहार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया गया था. परीक्षा 15 सितंबर से शुरू होनी थी.
15 सितंबर, मंगलवार
- प्रथम पाली — भाषा (हिंदी)
- द्वितीय पाली — विज्ञान
16 सितंबर, बुधवार
- प्रथम पाली — अंग्रेजी
- द्वितीय पाली — सामाजिक विज्ञान
17 सितंबर, गुरुवार
- प्रथम पाली — गणित
- द्वितीय पाली — संस्कृत/अन्य विषय
18 सितंबर, शुक्रवार
सह-शैक्षणिक गतिविधियों का समेकन एवं ग्रेडिंग
19 सितंबर, शनिवार
प्रथम पाली — राष्ट्रभाषा हिंदी
20 सितंबर, रविवार
मकतब एवं उर्दू विद्यालयों में गतिविधियों का समेकन एवं ग्रेडिंग
15 दिनों से स्कूल बंद, अब परीक्षा का इंतजार
बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में स्कूल करीब 15 दिनों से बंद हैं. इसी बीच बच्चों ने अर्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. लेकिन बाढ़ के कारण स्कूलों तक पहुंचने का रास्ता बंद होने और विद्यालय परिसरों में पानी जमा होने से परीक्षा प्रभावित हो गयी.
बलिया क्षेत्र की कक्षा छह की छात्रा अंजली कुमारी, रूबी और कक्षा आठ के छात्र अमन कुमार समेत अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल बंद रहने के बावजूद उन्होंने परीक्षा की तैयारी की थी. अब बाढ़ के कारण परीक्षा स्थगित होने से उन्हें नए कार्यक्रम का इंतजार है.
पानी घटने के बाद होगी विशेष परीक्षा
शिक्षा विभाग के अनुसार बाढ़ प्रभावित 169 विद्यालयों के बच्चों की परीक्षा रद्द नहीं की गयी है, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए स्थगित की गयी है. पानी घटने और विद्यालयों तक आवागमन बहाल होने के बाद इन विद्यार्थियों के लिए अलग से विशेष परीक्षा कार्यक्रम जारी किया जाएगा.
जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. जिन विद्यालयों में स्थिति सामान्य है, वहां परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित होगी. वहीं बाढ़ प्रभावित विद्यालयों में स्थिति सामान्य होने के बाद विशेष परीक्षा करायी जाएगी.
बच्चों की पढ़ाई के साथ सुरक्षा भी चुनौती
गंगा के बढ़े जलस्तर ने जिले के हजारों परिवारों को प्रभावित किया है. अब इसका सीधा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा पर भी पड़ा है. 169 विद्यालयों के 40 हजार से अधिक बच्चों को फिलहाल विशेष परीक्षा कार्यक्रम का इंतजार करना होगा. बाढ़ की स्थिति में बच्चों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता स्कूल तक सुरक्षित पहुंच और सामान्य शैक्षणिक माहौल की बहाली है.
