Begusarai News: जिले भर में 28 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक संचालित होने वाले 'एनीमिया मुक्त भारत' एवं 'गैर-संचारी रोग (NCD) महाभियान' को सफल और प्रभावी बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं. अभियान के क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), गढ़पुरा में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और एएनएम (ANM) के लिए एक दिवसीय विशेष उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला की अध्यक्षता पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामप्रीत राम ने की.
हीमोग्लोबिन जांच और AMB एप्लीकेशन पर रियल-टाइम डेटा एंट्री अनिवार्य
उन्मुखीकरण के दौरान प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (BHM) मनीष कुमार एवं प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक अमित कुमार ने स्वास्थ्य कर्मियों को तकनीकी दिशा-निर्देश दिए:
- लक्षित वर्ग: बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती और धात्री माताओं में एनीमिया की समय पर पहचान के लिए विशेष डिजिटल उपकरणों से मौके पर ही हीमोग्लोबिन (Hb) की त्वरित जांच की जाएगी.
- डिजिटल ट्रैकिंग: प्रतिदिन की जाने वाली हीमोग्लोबिन जांच और उपचार का पूरा रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से एएमबी (AMB) मोबाइल एप्लीकेशन पर दर्ज किया जाएगा.
- एनीमिक पाए जाने वाले मरीजों को निःशुल्क आयरन-फॉलिक एसिड सप्लीमेंट, आवश्यक परामर्श और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा.
30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की होगी NCD स्क्रीनिंग
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामप्रीत राम ने बताया कि अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों की गैर-संचारी रोगों की सघन स्क्रीनिंग की जाएगी:
- जांच स्थल: यह जांच सुविधा ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND), आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (APHC), पीएचसी, सीएचसी एवं जिला अस्पताल स्तर पर उपलब्ध रहेगी.
- जांच के दायरे में प्रमुख रोग: रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (डायबिटीज) के साथ-साथ मुंह, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग की जाएगी.
शुरुआती स्तर पर रोग की पहचान और रोकथाम मुख्य लक्ष्य
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि महाभियान का मूल उद्देश्य समुदाय स्तर पर जीवनशैली जनित बीमारियों और एनीमिया की शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर समय पर समुचित उपचार उपलब्ध कराना है. कार्यशाला में सभी सीएचओ और एएनएम को दैनिक जांच का सही आंकड़ा संधारित करने तथा गंभीर लक्षण दिखने पर मरीजों को अविलंब उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने का प्रशिक्षण दिया गया.
