बेगूसराय. लगभग एक सप्ताह में जिले का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो जाने तथा चिलचिलाती धूप व उमस भरी भीषण गर्मी से लोग हलकान हैं. शुक्रवार को अधिकतम तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहा. परंतु हीट वेब के कारण 44 डिग्री सेल्सियस का एहसास किया गया.वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री पहुंच गयी. शुक्रवार को को भी दिन निकलते ही धूप का असर दिखने लगा. दोपहर तक भीषण गर्मी और हवा मात्र 8 किमी प्रति घंटे की रही .कड़क धूप व उमस ने लोगों को हाल बेहाल कर दिया. सुबह सात बजे से 10 बजे तक तापमान 28 से 34 के बीच, पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न चार बजे तक तापमान 34 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है. वहीं रात का तापमान 30 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहती है.न्यूनतम तापमान में कोई खास कमी नहीं होने के कारण रात भी काफी गर्मी में गुजर रही है.दिन को चिलचिलाती धूप होने से जन जीवन अस्त व्यस्त रहा. बढ़ते गर्मी के कारण दोपहर के समय शहर के बाजारों में रौनक गायब होने लगी है. वहीं रसदार फलों की बिक्री में तेजी देखी जा रही हैं. जूस के दुकानों भीड़ बढ़ने लगी है. गर्मी के कारण लोग सिर व चेहरे पर कपड़ा ढक कर निकल रहें हैं. लोग इस बात से चिंतित हैं कि अप्रैल माह में ही जब इतना अधिक तापमान और गर्मी है तो मई-जून में तापमान की हालत क्या होगी. हर वर्ष गर्मी के मौसम में लू चलती है.अक्सर लोगों को लू और तापघात का शिकार हो जाने का खतरा बढ़ जाता है.जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के मद्देनजर डॉक्टर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. गर्मी के ये हालत सिर्फ बेगूसराय जिले या बिहार में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत में लगातार बढ़ते तापमान और लू की गतिविधियों से गर्मी बेहाल कर रखी है. हालांकि, वीकेंड तक मौसम में आंशिक परिवर्तन के भी संकेत हैं. आईएमडी ने 24 अप्रैल से एक नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण से उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे हिस्सों पर आंधी-पानी और ओले गिरने की चेतावनी जारी की है. उधर, दक्षिण भारत में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से मौसमी गतिविधियां हो सकती हैं. स्काईमेट ने पूर्वोत्तर के पांच राज्यों में भारी बारिश, तूफान और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है.जिसके असर से बिहार के तापमान में कुछ गिरावट होगी तो भीषण गर्मी से कुछ दिनों के लिए राहत का अनुमान है.
कहते हैं शिशु रोग विशेषज्ञ
गर्मी में छोटे बच्चों का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि उन्हें लू और डिहाइड्रेशन जल्दी लग जाता है. पानी और लिक्विड की कमी न होने दें.पानी पिलाते रहें. हर 30-40 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी दें. बच्चा मना करे तो जबरदस्ती नहीं, पर खेल-खेल में पिलाएं. घर का ओआरएस, नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ ये शरीर में नमक-चीनी का बैलेंस रखते हैं. डिब्बे वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक से बचें. उन्होंने कहा कि हल्का और सुपाच्य जैसे दाल-चावल, खिचड़ी, दही, दलिया दें. तला-भुना और मसालेदार खाना अवॉइड करें. बासी खाना बिल्कुल नहीं दें. गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है. जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है.
डॉ अरविंद कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ व सिटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के निदेशक