बीहट : एनटीपीसी को हस्तांतरित बरौनी थर्मल से बिजली का उत्पादन का मामला लगातार तिथियों के भंवर में फंसा है. बिजली उत्पादन शुरू होने की कई तिथियां निर्धारित की गयीं लेकिन हर बार मामला टलता रहा. बरौनी थर्मल की दो इकाइयों का जीर्णाेद्धार कार्य एनटीपीसी की देखरेख में विगत सात साल से चल रहा है लेकिन अब तक दो में से एक भी यूनिट से विद्युत उत्पादन शुरू नहीं हो सका है.
बरौनी थर्मल की उक्त दोनों यूनिटों से कब तक कॉमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होगा. इस मामले में अब कोई भी अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है. सूत्रों का कहना है कि दोनों इकाइयों के जीर्णाेद्धार में लगी कंपनी के अधिकारी बार-बार मामले को इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि यहां कार्य की सफलता को ही संदेह की नजर से देखा जा रहा है.
इसलिए डेढ़ साल में संपन्न हो जानेवाला कार्य सात साल में भी पूरा नहीं किया जा सका है. सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय सम विकास योजना से मिली छह सौ करोड़ की राशि कंपनी द्वारा खर्च भी की जा चुकी है फिर भी यूनिटों को उत्पादन लायक नहीं बनाया जा सका है. जनमानस के मन में यह सवाल तैर रहा है कि योजना के करोड़ों की राशि आखिर कहां गयी.
राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत एनटीपीसी की देखरेख में भेल के द्वारा करीब 600 करोड़ की लागत से किये जा रहे बरौनी थर्मल की 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाली छठी व सातवीं इकाई का जीर्णाेद्धार कार्य दो वर्ष में पूरा करना था. यह कार्य भेल के द्वारा पूर्णरूपेण सात वर्ष बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है. वर्ष 2006 से बंद पड़े बरौनी थर्मल में सातवीं इकाई का वर्ष 2010 में तथा छठी इकाई का जीर्णाेद्धार कार्य 2012 में शुरू किया गया था.
थर्मल के अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल : एनटीपीसी और भेल के अधिकारी जितना भी दावा कर लें लेकिन सूत्र बताते हैं कि बरौनी की दोनों इकाइयों को बंद रखना उनकी विवशता है. हालांकि अधिकारी इस संबंध में मुंह खोलना नहीं चाहते हैं लेकिन नाम न छापने की शर्त पर थर्मलकर्मियों का कहना है कि बरौनी थर्मल के अधिकारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर आरएंडएम वर्क में अनियमितता और भ्रष्टाचार किया गया है.
यूनियन नेताओं द्वारा भी आरएंडएम वर्क में अनियमितता और भ्रष्टाचार की जांच किसी स्वायत्त संगठन से कराने की मांग की गयी लेकिन उनकी मांग अनसुनी कर दी गयी. पूरे मामले में गौरतलब बात तो यह है कि आरएंडएम कार्य कंसल्टेंट नियुक्त एनटीपीसी की देखरेख में भेल द्वारा किया जा रहा था. देरी के कारण बढ़ती लागत और कर्मियों के दक्ष नहीं होने की बात कहते हुए बिहार सरकार ने अपना पल्ला झाड़ते हुए बरौनी थर्मल प्रतिष्ठान को एनटीपीसी को हस्तांतरित कर दिया.
: विद्युत उत्पादन नहीं होने से एनटीपीसी को करोड़ाें का घाटा : भेल द्वारा करीब छह सौ करोड़ की लागत से उक्त दोनों इकाई का आधुनिकीकरण व नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा था. उक्त कार्य का कंसल्टेंट एनटीपीसी को बनाया गया था, जिसमें भेल को लगभग पांच सौ पैंतीस करोड़ और कंसल्टेंट एनटीपीसी को लगभग 28 करोड़ कंसलटेंसी चार्ज मिलना था.
मजे की बात तो यह है कि समय पर काम पूरा नहीं होने पर कार्रवाई के बजाय बिहार सरकार ने उसे एनटीपीसी के हाथों यह कहते हुए बेच लिया कि एनटीपीसी विद्युत उत्पादन करने में एक्सपर्ट है. दीगर की बात तो यह है कि एनटीपीसी एक्सपर्ट होते हुए भी विगत चार महीने के बाद भी उत्पादन शुरू करने में सक्षम नहीं हो पा रही है, जिसके कारण उसे करोड़ों के राजस्व का घाटा उठाना पड़ रहा है.
इसके अलावा वहां पदस्थापित सीआइएसएफ के वेतन सहित अन्य मदों में दो करोड़ से अधिक का भुगतान अलग से करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं बरौनी के 51 कर्मियों की प्रतिनियुक्ति के एवज में उसे सैलरी पर भी मई तक खर्च करना पड़ेगा.
थर्मल कॉलोनी की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त : बरौनी थर्मल कॉलोनी के क्वार्टरों की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है. खास करके कर्मियों के बरौनी से विरमित होने के बाद क्वार्टरों के खिड़की, किवाड़, चौखट, ग्रिल सहित अन्य सामान तेजी से चोरी की जा रही है.
खाली आवास के दर्जनों घरों से कीमती लकड़ियों के सामान उपनगरी में रहनेवाले लोगों के साथ-साथ अगल-बगल गांव के लोगों द्वारा चोरी की जारी है. उपनगरी में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहने से चोरी के सामान आराम से बाहर निकाले जा रहे हैं. वहीं एनटीपीसी के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं.
क्या कहते हैं मजदूर यूनियन के नेता
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री सुनील कुमार ने कहा एनटीपीसी के आने से लोगों को लगा था कि उत्पादन शुरू होगा, लेकिन लोगों को निराशा हो रही है. आरएंडएम कार्य में भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए.
वहीं इंटक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चुनचुन राय ने कहा बरौनी कुछ लोगों के लिए कामधेनू बना हुआ है. करोड़ों खर्च के बाद भी बिजली उत्पादन का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
एनटीपीसी की देखरेख में यूनिटों का आरएंडएम कार्य हुआ, फिर भी बिजली उत्पादन का शुरू न होना, जांच का विषय है. एटक नेता प्रह्लाद सिंह ने कहा बरौनी में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के संरक्षण में लूट हुई है. इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.
जापान की मदद से लगनी थी नयी यूनिट
बरौनी थर्मल में जापान की मदद से 660 मेगावाट की एक और नयी यूनिट लगाने की योजना भी अधर में लटक गयी है. विदित हो कि वर्ष 2015 में जापान इंटरनेशनल काॅरपोरेशन एजेंसी के प्रतिनिधियों ने यूनिट लगाने के लिए स्थल की भी जांच को पहुंची थी लेकिन दुर्भाग्य से एक्सटेंशन प्रोजेक्ट की आठवीं तथा नौवीं युनिट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है. फलस्वरूप बरौनी से कुल 1380 मेगावाट विद्युत उत्पादन की योजना खटाई में पड़ गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
अगले महीने मई में विद्युत उत्पादन का टारगेट रखा गया है. इसी कारण से बरौनी कर्मियों को प्रतिनियुक्ति पर रखा गया है ताकि उनके सहयोग से बरौनी को चालू किया जा सके. वहीं उन्होंने बताया कि उपनगरी के संसाधनों से खिलवाड़ करनेवाले लोगों को चिह्नित किया जा रहा है. उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
दिनकर शर्मा, एचआर, एनटीपीसी
