बांका. कभी गांव की महिलाओं की कलाई, बांह और हाथों पर बने गोदने उनकी पहचान, परंपरा और आस्था की कहानी कहते थे. मेले-ठेले में गोदना गोदने वालों के आसपास भीड़ जुटती थी और सुई की हल्की चुभन के साथ देह पर फूल-पत्ती, बेल-बूटे और धार्मिक चिन्ह उकेर दिए जाते थे. वक्त बदला तो गोदना भी बदल गया. वही पुरानी परंपरा अब आधुनिक टैटू के रूप में युवाओं की पसंद बनती जा रही है. खासकर मेलों में टैटू बनवाना युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
गोदना बदला तो अंदाज और डिजाइन भी बदल गये
पुराने दौर में गोदना सिर्फ श्रृंगार का माध्यम नहीं था. इसमें परंपरा, सामाजिक पहचान और आस्था की झलक दिखाई देती थी. दादी-नानी की कलाई और बांह पर बने पुराने गोदने आज भी बीते समय की याद दिलाते हैं.
अब युवाओं की पसंद बदल गयी है. कोई अपनी कलाई पर नाम लिखवा रहा है तो कोई प्रिय व्यक्ति के नाम का पहला अक्षर. कोई खास तारीख, धार्मिक प्रतीक, पशु-पक्षी या आधुनिक डिजाइन को अपनी त्वचा पर उकेरवा रहा है.
फैशन के साथ भावनाओं को भी दे रहे स्थायी पहचान
आज टैटू किसी के लिए फैशन है तो किसी के लिए अपनी भावनाओं और यादों को हमेशा साथ रखने का माध्यम. युवाओं के बीच टैटू अब सिर्फ शरीर पर बना डिजाइन नहीं, बल्कि अपनी पहचान और व्यक्तिगत कहानी को व्यक्त करने का जरिया भी बन गया है. नाम, प्रेम, रिश्ते, धार्मिक आस्था और जीवन की खास यादों से जुड़े डिजाइन युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं.
मेले में मशीन की भनभनाहट और टैटू स्टॉल पर भीड़
गांव और कस्बों में लगने वाले मेलों में टैटू बनाने वाले स्टॉल युवाओं को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं. रंग-बिरंगे डिजाइन और अलग-अलग आकार के टैटू देखकर युवा अपनी पसंद का डिजाइन चुनते हैं. कुछ लोग मौके पर ही नया डिजाइन तैयार करवाते हैं, जबकि कई युवा अपने मोबाइल में पहले से पसंदीदा डिजाइन लेकर टैटू कलाकार के पास पहुंचते हैं. मशीन की आवाज और सुई की हल्की चुभन के बीच कुछ ही समय में त्वचा पर पसंदीदा डिजाइन उभर आता है.
सोशल मीडिया पर भी साझा कर रहे अपनी नई पहचान
टैटू बनवाने के बाद युवा उसकी तस्वीर और वीडियो कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं. मेले में टैटू बनवाने का अनुभव युवाओं के लिए फैशन के साथ एक अलग तरह का रोमांच भी बन रहा है. यही वजह है कि पारंपरिक मेलों में आधुनिक टैटू का कारोबार तेजी से अपनी जगह बना रहा है.
शौक के साथ रोजगार का नया जरिया बना टैटू
टैटू का बढ़ता चलन अब युवाओं और कलाकारों के लिए रोजगार का नया रास्ता भी खोल रहा है. इस कारोबार से जुड़े कार्तिक कुमार बताते हैं कि टैटू की कीमत उसके आकार और रंग के हिसाब से तय होती है.
उनके अनुसार ब्लैक एंड व्हाइट टैटू के लिए करीब 100 रुपये प्रति एमएम और कलर टैटू के लिए करीब 150 रुपये प्रति एमएम की दर से शुल्क लिया जाता है. डिजाइन की जटिलता और आकार के आधार पर कीमत में अंतर हो सकता है.
हुनर, डिजाइन और ग्राहकों की पसंद समझना जरूरी
टैटू आर्टिस्ट के लिए डिजाइन की समझ और ग्राहकों की पसंद को समझना इस काम की अहम जरूरत है. सोशल मीडिया ने भी इस कारोबार को नई गति दी है. कलाकार अपने बनाए डिजाइन ऑनलाइन साझा कर अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं और नए ग्राहक तलाश रहे हैं. बदलती पसंद के साथ टैटू कला अब केवल शौक नहीं, बल्कि हुनर आधारित रोजगार के रूप में भी उभर रही है.
पुराना गोदना और आधुनिक टैटू के बीच बदली कहानी
टैटू की दुनिया ने परंपरा और आधुनिकता को एक नए रूप में जोड़ दिया है. पुराने गोदने में जहां गांव, समाज और परंपरा की पहचान दिखाई देती थी, वहीं आज के टैटू में व्यक्तिगत पसंद, रिश्ते, यादें और फैशन की झलक मिलती है.
कभी मेले में गोदना परंपरा की पहचान था, आज उसी मेले में आधुनिक टैटू युवाओं के फैशन का आकर्षण बन गया है.
टैटू बनवाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा पर भी ध्यान जरूरी
शरीर पर स्थायी टैटू बनवाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है. साफ उपकरण, उचित सैनिटाइजेशन और प्रशिक्षित कलाकार का चयन संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है. टैटू बनवाने वालों को इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की स्वच्छता और सुरक्षा मानकों के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए.
सुई वही है, बदल गई है उसकी कहानी
कभी सुई से देह पर परंपरा की कहानी लिखी जाती थी, आज युवा उसी माध्यम से अपनी पसंद, प्रेम और पहचान को उकेरवा रहे हैं. पुराने गोदने से आधुनिक टैटू तक का यह सफर बदलते समाज और बदलती पीढ़ी की पसंद को दर्शाता है. और इसी बदलती पसंद ने कलाकारों के हाथ में हुनर के साथ रोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा कर दी हैं.
