Banka Weather : बांका जिले में इन दिनों मानसून सक्रिय है. सुबह हल्की धूप के बाद आसमान में बादल छाने और दोपहर बाद विभिन्न इलाकों में बारिश होने की संभावना बनी हुई है. बारिश से जहां कांवरिया पथ पर चल रहे श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से राहत मिल रही है, वहीं किसानों ने खेती-किसानी के काम में तेजी ला दी है. मौसम विभाग ने बांका, भागलपुर समेत दक्षिण-पूर्वी बिहार के कई जिलों में बारिश, तेज हवा और गरज-चमक को लेकर Yellow Alert जारी किया है.
बादलों की आवाजाही के बीच बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार बांका व आसपास के क्षेत्रों में 50 से 55 प्रतिशत तक बारिश होने की प्रबल संभावना है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है. बादल गरजने और बिजली कड़कने की भी आशंका है. आसमान में बादल छाए रहेंगे. आर्द्रता सुबह 80 से 85 प्रतिशत और रात में बढ़कर 90 से 94 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. जिले में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदला मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और आसपास बने मौसमी सिस्टम के कारण वातावरण में नमी बनी हुई है. इसी वजह से बारिश की गतिविधियां आगे भी जारी रहने की संभावना है. मौसम खराब होने पर लोगों को खुले मैदान, खेत, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गयी है. गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित पक्के भवन में शरण लेने की अपील की गयी है.
12 अगस्त तक बारिश का पूर्वानुमान
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र ने 8 से 12 अगस्त तक बांका में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. इस दौरान घने बादल छाए रहने तथा एक-दो स्थानों पर आंधी चलने की संभावना है. अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. दक्षिण-पूर्व दिशा से 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है.
धान रोपनी में देरी पर उपज को नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की रोपनी अगस्त के पहले सप्ताह में पूरी करने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों के अनुसार रोपनी में अधिक देरी होने पर धान की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. रोपाई के लिए 18 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों का इस्तेमाल करने तथा पौधों के बीच 15×15 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह दी गयी है. बारिश और खेतों में बनी नमी से किसानों को धान रोपनी तेजी से पूरी करने में मदद मिल रही है.
