लौढ़िया खुर्द पंचायत में स्वच्छता का हाल : कागजों में चमक रहा अभियान, जमीन पर कचरा ही कचरा

Banka News : गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच बांका जिले की लौढ़िया खुर्द पंचायत की तस्वीर सरकारी योजनाओं की हकीकत बयां कर रही है. यहां कचरा उठाव के लिए खरीदे गए वाहन शो-पीस बन चुके हैं, जबकि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का अंबार लगा है. हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को दुर्गंध, गंदगी और बीमारियों के खतरे के बीच जीवन गुजारना पड़ रहा है.

पंजवारा (बांका) गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : लौढ़िया खुर्द पंचायत में चल रहे ‘लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान’ की स्थिति बेहद खराब है. योजना के तहत घर-घर कचरा संग्रहण और नियमित सफाई का दावा किया गया था, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था लगभग ठप है. पंचायत के कई हिस्सों में कचरा दिनों और हफ्तों तक जमा रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि अभियान की सफलता के जो दावे किये जाते हैं, वे केवल कागजों और सरकारी रिपोर्टों तक सीमित हैं. धरातल पर न तो नियमित सफाई दिख रही है और न ही कचरा प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था.

कचरा वाहन बने शो-पीस, सड़कों पर पसरी गंदगी

पंचायत में कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराये गये वाहन अधिकांश समय बेकार खड़े दिखाई देते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, ये वाहन या तो पंचायत भवन के पास खड़े रहते हैं या किसी कोने में धूल फांकते नजर आते हैं. नतीजतन मुख्य सड़कों, बाजार क्षेत्र और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर जमा हो गए हैं. कई स्थानों पर कचरे से उठ रही दुर्गंध के कारण लोगों का वहां से गुजरना तक मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण पंचायत की सुंदरता प्रभावित हो रही है.

ग्रामीणों का आरोप, जिम्मेदारी से दूर हैं स्वच्छता कर्मी

स्थानीय ग्रामीणों ने स्वच्छता कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कई वार्डों में सप्ताहों तक कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचती हैं. ऐसे में लोग मजबूरी में अपने घरों का कचरा सड़क किनारे, खाली जगहों या नालियों में फेंकने को विवश हैं. जगह-जगह नालियां जाम हो चुकी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है. इससे डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है.

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी परेशानी, जांच की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में सफाई व्यवस्था की निगरानी लगभग नहीं के बराबर है. कई बार शिकायत और मौखिक आग्रह के बावजूद जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है. उनका मानना है कि यदि बरसात से पहले कचरा हटाने और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो जाएंगे. लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

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Author: AMIT KUMAR SINH

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