शिवपुरी पहाड़ मंदिर के पुजारी लाली बाबा का निधन, सोमवती अमावस्या पर बांका में छाया शोक

Lali Baba Death News : जहाँ सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों की ओर उमड़ती है, वहीं इस बार शिवपुरी पहाड़ की वादियाँ गहरे सन्नाटे में डूब गईं. साधना, सेवा और शिवभक्ति के प्रतीक लाली बाबा के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया. वर्षों तक जिन्होंने पहाड़ की कठिन सीढ़ियां चढ़कर भगवान शिव की आराधना की, आज वही संत इस दुनिया से विदा हो गए, जिससे श्रद्धालुओं के बीच गहरा शोक फैल गया और वातावरण पूरी तरह भावुक हो उठा.

पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : बांका जिले के धोरैया प्रखंड स्थित प्रसिद्ध शिवपुरी पहाड़ शिव मंदिर के पुजारी चेतनानंद शास्त्री उर्फ लाली बाबा का सोमवार सुबह निधन हो गया. सोमवती अमावस्या के दिन उनके निधन की खबर जैसे ही फैली, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई. मंदिर परिसर से लेकर आसपास के गांवों तक गमगीन माहौल बन गया. लोग उन्हें एक साधारण पुजारी नहीं बल्कि एक संत के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान शिव की सेवा, साधना और धार्मिक परंपराओं के विस्तार में समर्पित कर दिया था.

आजीवन शिवभक्ति में समर्पित जीवन

लाली बाबा ने अपना पूरा जीवन शिवपुरी पहाड़ स्थित भगवान शिव मंदिर की सेवा और साधना में समर्पित कर दिया था. वे वर्षों से मंदिर के नीचे बनी एक साधारण कुटिया में निवास करते थे और अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते थे. वृद्धावस्था में भी उनकी आस्था और भक्ति में कोई कमी नहीं आई. वे प्रतिदिन पहाड़ की कठिन सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचते और नियमित रूप से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते थे. उनकी दिनचर्या पूरी तरह धर्म और भक्ति के अनुशासन में बंधी हुई थी, जो श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायक बन गई थी.

धर्म और कथा परंपरा के विद्वान संत

लाली बाबा केवल मंदिर के पुजारी ही नहीं बल्कि एक विद्वान संत और कथा वाचक भी थे. उन्हें रामकथा और श्रीमद्भागवत कथा का गहरा ज्ञान था, जिसे वे सरल और प्रभावी शैली में श्रद्धालुओं तक पहुंचाते थे. उनके सानिध्य में कई बार भव्य धार्मिक आयोजन, यज्ञ और कथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए. उनकी वाणी में आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन के गहरे संदेश होते थे. लोग दूर-दूर से उनकी कथा सुनने आते थे और उनके विचारों से प्रभावित होकर आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर होते थे.

सादगी और सेवा का अद्भुत उदाहरण

लाली बाबा का जीवन अत्यंत सादगी और त्याग का प्रतीक था. उन्होंने कभी भी भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर आकर्षण नहीं रखा और पूरी तरह भगवान शिव की भक्ति एवं समाज की सेवा को ही अपना उद्देश्य बनाया. मंदिर के नीचे बनी छोटी सी कुटिया में रहकर उन्होंने वर्षों तक साधना की. उनका व्यवहार अत्यंत विनम्र, शांत और करुणामय था. वे हर श्रद्धालु से समान भाव से मिलते थे. उनका जीवन यह संदेश देता था कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं बल्कि सरलता और समर्पण में होती है.

परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर

लाली बाबा अपने पीछे दो पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके एक पुत्र प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं, जबकि दूसरा पुत्र धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है. उनके निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग उन्हें अंतिम बार श्रद्धांजलि देने पहुंचे. हर किसी की आंखें नम थीं और वातावरण में भारी भावुकता देखने को मिली, जैसे किसी आध्यात्मिक युग का अंत हो गया हो.

श्रद्धांजलि और अपूरणीय क्षति की भावना

संत-महात्माओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने लाली बाबा के निधन को धर्म और आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति बताया है. सभी ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा. लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की कामना की. शिवपुरी पहाड़ मंदिर परिसर में शांति और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है, जहां लोग लगातार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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