मोबाइल हैक कर दोस्त को भेजा मैसेज, बोला- अस्पताल में भर्ती हूं, तुरंत 2 हजार भेजो, शंभुगंज में ऐसे खुला साइबर ठगी का राज

साइबर अपराधियों ने नया तरीका अपनाया! एक युवक का मोबाइल हैक कर उसके दोस्त से इलाज के नाम पर ₹2000 ठग लिए. यह मामला शंभुगंज का है, जहां दोस्तों के भरोसे को ही ठगी का हथियार बनाया गया.

Shambhuganj Cyber Crime: शंभुगंज (बांका) में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा तरीका अपनाया कि मोबाइल एक युवक का हैक किया और निशाना उसके दोस्त को बना दिया. मामला बांका के शंभुगंज थाना क्षेत्र के चंद्रपुर बग्घा गांव का है, जहां साइबर अपराधियों ने एक युवक के मोबाइल का कथित रूप से इस्तेमाल कर उसके परिचित से इलाज के नाम पर 2 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिये.

ठगों ने युवक के दोस्त को भरोसा दिलाया कि उसका परिचित अचानक बीमार होकर अस्पताल में भर्ती है और तत्काल इलाज के लिए पैसे की जरूरत है. दोस्त ने बिना ज्यादा पड़ताल किये यूपीआई के माध्यम से रुपये भेज भी दिये. लेकिन कुछ देर बाद जब दोनों आमने-सामने मिले, तो पूरी कहानी सामने आ गयी.

जिस युवक के अस्पताल में भर्ती होने की बात कही गयी थी, वह बिल्कुल ठीक था.

अस्पताल में भर्ती होने की बात सुनकर दोस्त ने भेज दिये रुपये

चंद्रपुर बग्घा गांव निवासी राज कुमार, पिता दिलीप यादव, का मोबाइल फोन साइबर अपराधियों ने कथित रूप से हैक कर लिया.

मोबाइल तक पहुंच बनाने के बाद अपराधियों ने उसमें मौजूद संपर्कों का इस्तेमाल किया. उन्होंने गांव के ही पांडू कुमार, पिता चंदेश्वर यादव, को कॉल किया.

कॉल करने वाले ने खुद को राज कुमार बताते हुए कहा कि उसकी तबीयत अचानक खराब हो गयी है और वह अस्पताल में भर्ती है. इलाज के लिए तत्काल दो हजार रुपये की जरूरत है.

दोस्त की परेशानी सुनकर पांडू कुमार घबरा गये. उन्हें लगा कि राज कुमार सच में अस्पताल में भर्ती है और उसे तत्काल आर्थिक मदद चाहिए.

उन्होंने बिना मौके पर जाकर या राज कुमार से सीधे पुष्टि किये बताये गये खाते में यूपीआई के जरिये दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिये.

कुछ देर बाद आमने-सामने मिले तो खुल गया पूरा मामला

ऑनलाइन रुपये भेजने के कुछ देर बाद पांडू कुमार की मुलाकात राज कुमार से हो गयी.

पांडू ने जब राज कुमार से उसकी तबीयत और अस्पताल में भर्ती होने के बारे में पूछा, तो वह खुद हैरान रह गया. राज कुमार ने साफ कहा कि वह न तो अस्पताल में भर्ती हुआ था और न ही उसने पांडू से दो हजार रुपये मांगे थे.

दोनों दोस्तों के बीच बातचीत के बाद साफ हुआ कि किसी तीसरे व्यक्ति ने राज कुमार के मोबाइल का कथित रूप से इस्तेमाल कर पांडू को झांसे में लिया था.

यानी ठगों ने सिर्फ मोबाइल हैक नहीं किया, बल्कि मोबाइल में मौजूद परिचितों की सूची का इस्तेमाल कर भरोसे के रिश्ते को ही ठगी का हथियार बना लिया.

मोबाइल हैकिंग के बाद दोस्त बना साइबर अपराधियों का निशाना

इस घटना में साइबर अपराधियों का तरीका खास तौर पर ध्यान खींचता है. आमतौर पर लोग अनजान नंबर से आने वाली पैसों की मांग को लेकर सतर्क रहते हैं.

लेकिन जब कॉल या संदेश किसी परिचित के नाम और नंबर से आता है, तो भरोसा जल्दी हो जाता है. इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगों ने पांडू कुमार से रुपये ट्रांसफर करा लिये.

मामले से यह भी पता चलता है कि मोबाइल फोन में मौजूद कॉन्टैक्ट लिस्ट साइबर अपराधियों के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है. मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच मिलने के बाद अपराधी परिचितों को निशाना बनाकर ठगी का प्रयास कर सकते हैं.

ठगी के बाद दोनों दोस्त पहुंचे थाने

घटना का पता चलने के बाद राज कुमार अपने दोस्त पांडू कुमार के साथ शंभुगंज थाना पहुंचे.

दोनों ने पुलिस पदाधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने मामले को साइबर अपराध से जुड़ा बताया.

पुलिस ने उन्हें बांका साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है. शिकायत के बाद मामले में आगे की जांच और कार्रवाई की जा सकती है.

फिलहाल इस घटना में साइबर अपराधियों ने किस तरह राज कुमार के मोबाइल तक पहुंच बनाई और रुपये किस खाते में ट्रांसफर कराये गये, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद सामने आ सकती है.

एक छोटी सी चूक से चला गया पैसा

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पांडू कुमार ने पैसे भेजने से पहले राज कुमार से सीधे बात कर पुष्टि नहीं की.

साइबर ठगी में यही कुछ सेकेंड की जल्दबाजी भारी पड़ सकती है. परिचित के नाम से आने वाला कॉल या संदेश भी हमेशा सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है.

खासकर जब कोई अचानक अस्पताल, दुर्घटना, बीमारी या किसी आपात स्थिति का हवाला देकर तत्काल पैसे भेजने को कहे, तो पहले संबंधित व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से संपर्क कर सत्यापन करना जरूरी है.

Shambhuganj Cyber Crime: पुलिस ने लोगों को दी जरूरी सावधानी बरतने की सलाह

शंभुगंज पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी परिचित या रिश्तेदार के नाम से ऑनलाइन पैसे की मांग आने पर तुरंत रुपये ट्रांसफर न करें.

पहले स्वयं उस व्यक्ति से बात कर पूरे मामले की पुष्टि करें. यदि फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो उसके परिवार के किसी सदस्य या दूसरे परिचित से जानकारी ली जा सकती है.

पुलिस ने बिना सत्यापन के किसी भी खाते में ऑनलाइन पैसे नहीं भेजने की सलाह दी है.

यह घटना स्थानीय लोगों के लिए भी चेतावनी है कि मोबाइल और सोशल कॉन्टैक्ट की सुरक्षा को हल्के में न लें. साइबर अपराधी अब अनजान लोगों को ही नहीं, बल्कि परिचितों के नाम और रिश्तों का इस्तेमाल कर भी ठगी कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By ठाकुर विनोद कुमार

ठाकुर विनोद कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. शंभूगंज (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं.

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