Panjwara Bridge: पंजवारा (बांका). बिहार को झारखंड से जोड़ने वाला पंजवारा बाजार का पुल सिर्फ दो राज्यों के बीच आवाजाही का रास्ता नहीं है, बल्कि रोजाना हजारों लोगों की मजबूरी भी बन चुका है. संकरी सड़क, पुल के दोनों छोर पर पसरा अतिक्रमण और उसी रास्ते से गुजरते भारी वाहनों ने यहां हादसे का खतरा बढ़ा दिया है.
हालात ऐसे हैं कि पुल पर एक तरफ बड़े-बड़े ट्रक और टैंकर गुजरते हैं, तो दूसरी तरफ सड़क किनारे सब्जी और चाट-चाउमीन की दुकानें सजी रहती हैं. इनके बीच से पैदल चलने वाले लोगों और छोटे वाहनों को रास्ता बनाना पड़ता है. पर्व-त्योहार के दौरान भीड़ बढ़ते ही यही व्यवस्था जाम में बदल जाती है.
ग्रामीणों को डर है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं बदली गयी, तो किसी दिन यह लापरवाही बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है.
पुल के मुहाने पर दुकानें, बीच सड़क में भारी वाहन
पंजवारा बाजार के इस पुल के दोनों छोर पर रोजाना सब्जी विक्रेता सड़क के किनारे दुकानें लगा लेते हैं. इसके अलावा ठेले पर चाट और चाउमीन की दुकानें भी सज जाती हैं.
दुकानों के कारण पुल के आसपास सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है. इसी संकरे रास्ते से दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहती है.
ट्रक या टैंकर के गुजरने के दौरान पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कुछ पल की असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है.
एक ही रास्ते पर ट्रक, टैंकर, ठेले और पैदल यात्री
पंजवारा पुल बिहार और झारखंड के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. इसलिए यहां वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है.
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक समस्या सिर्फ वाहनों की संख्या नहीं है. असली परेशानी पुल के आसपास सड़क पर बढ़ता अतिक्रमण और भारी वाहनों का एक साथ गुजरना है.
एक ओर दुकानें सड़क की जगह घेर लेती हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े वाहनों को उसी सीमित जगह से निकलना पड़ता है. ऐसे में पुल पर चलने वाले लोगों के लिए सुरक्षित जगह बेहद कम बचती है.
त्योहार आते ही पुल पर बढ़ जाता है जाम का दबाव
पर्व-त्योहार के दौरान पंजवारा बाजार पुल की समस्या और गंभीर हो जाती है. लोगों की आवाजाही बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या भी बढ़ जाती है.
भारी भीड़ और वाहनों के दबाव के कारण कई बार पुल और उसके आसपास घंटों जाम की स्थिति बन जाती है. इससे बिहार और झारखंड के बीच आने-जाने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान यदि भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट की व्यवस्था की जाए और पुल के दोनों छोर को पूरी तरह खाली कराया जाए, तो जाम और हादसे दोनों का खतरा कम किया जा सकता है.
कार्रवाई होती है, लेकिन दुकानें फिर वहीं लग जाती हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण को लेकर स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायत की जा चुकी है. प्रशासन की ओर से कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं बन पा रहा है.
ग्रामीणों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे लगी दुकानों को हटाया जाता है. लेकिन प्रशासनिक टीम के वापस जाते ही कुछ समय बाद दुकानदार फिर उसी जगह अपनी दुकानें लगा लेते हैं.
यही वजह है कि लोगों की मांग अब सिर्फ एक-दो दिन की कार्रवाई की नहीं, बल्कि पुल के दोनों छोर को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त रखने की है.
ग्रामीणों की मांग- त्योहारों में बदला जाए भारी वाहनों का रूट
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है.
ग्रामीण चाहते हैं कि पुल के दोनों छोर पर अतिक्रमण हटाकर वाहनों के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही पर्व-त्योहार के दौरान भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जाए, ताकि बाजार और पुल पर वाहनों का दबाव कम हो.
लोगों का कहना है कि पंजवारा पुल से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं. ऐसे में किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही जोखिम कम करने की दिशा में काम करना चाहिए.
Panjwara Bridge: सवाल यही- हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले?
पंजवारा पुल पर मौजूदा स्थिति प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल खड़ा करती है. जब पुल संकरा है, भारी वाहनों की आवाजाही लगातार है और सड़क के किनारे अतिक्रमण भी मौजूद है, तो सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते पुल और उसके आसपास की व्यवस्था नहीं सुधारी गयी, तो किसी दिन जाम के बीच कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
अब देखना यह है कि प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को सिर्फ अभियान तक सीमित रखता है या पंजवारा पुल के दोनों छोर को स्थायी रूप से सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए ठोस व्यवस्था करता है.
