बांका के सदर अस्पताल में आज ओपीडी और ब्लड सेंटर बंद, इमरजेंसी सेवा 24 घंटे रही चालू
Banka Health Update : रविवार को अस्पताल जाने से पहले यह जानकारी आपके लिए जरूरी है. सदर अस्पताल बांका में जहां ओपीडी और ब्लड सेंटर बंद रहे, वहीं मरीजों की सुविधा के लिए इमरजेंसी सेवा 24 घंटे संचालित की गई और विभिन्न विभागों में चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित की गयी.
बांका से नवनीत कुमार की रिपोर्ट
Banka News : सदर अस्पताल बांका में रविवार को नियमित ओपीडी सेवा और ब्लड सेंटर बंद रहा. हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी सेवा को 24 घंटे चालू रखा. मरीजों के समुचित इलाज और देखभाल के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी.
इमरजेंसी में तीन पालियों में चिकित्सकों की तैनाती
अस्पताल द्वारा जारी रोस्टर के अनुसार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक डॉ उस्मान गनी इमरजेंसी सेवा में तैनात रहे. दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक डॉ संजीव कुमार ने मरीजों का इलाज किया. वहीं रात 8 बजे से सोमवार सुबह 8 बजे तक डॉ रविकांत इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे. रविवार होने के कारण सदर अस्पताल में नियमित ओपीडी सेवा संचालित नहीं हुई. इसके साथ ही ब्लड सेंटर भी बंद रहा. अस्पताल प्रशासन ने सामान्य मरीजों से अगले कार्य दिवस में ओपीडी सेवा का लाभ लेने की अपील की.
महिला चिकित्सक और एसएनसीयू में भी रही विशेष व्यवस्था
महिला मरीजों की सुविधा के लिए डॉ अमृता प्रीतम की ड्यूटी लगाई गई थी. वहीं नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए संचालित एसएनसीयू में डॉ बालकृष्ण चौधरी और डॉ रविकांत अपनी सेवाएं देते रहे.
एनेसथेसिया विभाग में भी चिकित्सक रहे मुस्तैद
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि एनेसथेसिया विभाग में डॉ कुमार सौरभ की तैनाती की गई थी. आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी.
सभी वार्डों में नर्सों की रही तैनाती
मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए अस्पताल के सभी वार्डों में ए ग्रेड नर्स एवं जीएनएम की प्रतिनियुक्ति पूर्ववत रखी गई थी. अस्पताल प्रबंधन ने वार्ड स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी भी जारी रखी.
ऑन कॉल ड्यूटी पर भी मौजूद रहे चिकित्सक
अस्पताल में किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए ऑन कॉल ड्यूटी पर भी चिकित्सकों को रखा गया था. इसके अलावा प्रसव कक्ष में महिला चिकित्सकों की ड्यूटी विभिन्न शिफ्टों में निर्धारित की गई थी, ताकि गर्भवती महिलाओं को निर्बाध स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.