मुंगेर के कृष्णा सेतु होकर आ रहा माल, 100 किमी का सफर अब हुआ 250 किलोमीटर
बांका की मुख्य व्यवसायिक मंडी पूरी तरह पूर्णिया के गुलाबबाग पर आधारित है, जहाँ से हर दिन भारी मात्रा में खाद्यान्नों की आवक होती है. पिछले पखवाड़े (15 दिन) से भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त होने के कारण पूरा परिवहन तंत्र छिन्न-भिन्न हो गया है. पहले जो ट्रक भागलपुर होते हुए महज 100 किलोमीटर की दूरी तय कर बांका पहुंच जाते थे, उन्हें अब मुंगेर के श्री कृष्णा सेतु (घाट) होकर घूमकर आना पड़ रहा है. इस डायवर्जन के कारण वाहनों को लगभग 250 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है.
डीजल की मार और बढ़े भाड़े से आम जनता की जेब पर बढ़ा बोझ
एक तरफ रूट लंबा होने से ट्रकों का भाड़ा दोगुना हो गया है, वहीं दूसरी तरफ हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि ने आग में घी का काम किया है. बांका के स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि परिवहन लागत (ढुलाई खर्च) में अत्यधिक बढ़ोतरी के कारण वे चाहकर भी पुराने दामों पर सामान नहीं बेच पा रहे हैं. महंगाई की इस दोहरी मार के चलते थोक और खुदरा बाजारों में जिंसों के दाम अस्थिर बने हुए हैं. आने वाले दिनों में तेलहन और दलहन की कीमतों में और तेजी आने के संकेत हैं.
बांका मंडी का आज का ताजा भाव (प्रति क्विंटल)
स्थानीय व्यवसायिक मंडी के अनुसार, बाजार में आवक के उतार-चढ़ाव के आधार पर आज विभिन्न खाद्यान्नों और आवश्यक सामग्रियों की दरें (रुपये में) नीचे दी गई सारणी के अनुसार दर्ज की गईं:
| खाद्यान्न / सामग्री | न्यूनतम मूल्य (₹) | उच्चतम मूल्य (₹) |
| गेहूं | 2600 | 2650 |
| मक्का | 2100 | 2150 |
| चावल (मंसूरी) | 3250 | 3400 |
| चावल (अरवा मोटा) | 3100 | 3250 |
| चावल (बासमती) | 12500 | 13500 |
| दाल (मसूर) | 5550 | 6750 |
| दाल (मूंग) | 9540 | 9600 |
| दाल (अरहर) | 11000 | 14500 |
| गोटा चना | 6200 | 6400 |
| गोटा मूंग | 8500 | 9000 |
| पीला सरसों | 7300 | 7550 |
| सरसों तेल (प्रति 15 लीटर) | 2070 | 2470 |
| आलू | 1200 | 1450 |
| प्याज | 1800 | 1900 |
व्यापारियों का मानना है कि जब तक विक्रमशिला सेतु पर परिचालन सुचारू नहीं हो जाता या प्रशासन द्वारा रूट को लेकर कोई सुलभ वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक खाद्यान्नों की कीमतों में नरमी आने की संभावना बेहद कम है.
बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट:
