38 वर्षों की डाक कांवर परंपरा के बाद फिर पैदल बाबाधाम जाएंगी माता बम, 9 को सुल्तानगंज से उठाएंगी गंगाजल

Krishna Bam : 38 वर्षों तक डाक कांवर चढ़ाने वाली 75 वर्षीय माता बम इस बार एक नए संकल्प के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की पैदल यात्रा करेंगी. 9 अगस्त को सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर वह अपने इस अनूठे सफर पर निकलेंगी.

Krishna Bam : श्रद्धालुओं के बीच 'माता बम' के नाम से प्रसिद्ध कृष्णा बम इस बार डाकबम के रूप में नहीं, बल्कि पैदल यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचेंगी. उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर बाबाधाम के लिए रवाना होंगी. इस खबर से कांवरिया पथ पर उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे शिवभक्तों में उत्साह बढ़ गया है.

ओंकारेश्वर और उज्जैन में जलार्पण के बाद आएंगी सुल्तानगंज

फिलहाल 75 वर्षीय माता बम मध्यप्रदेश में नर्मदा तट से जल लेकर लगभग 125 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर हैं. पहाड़ी रास्तों, घाटियों और दुर्गम क्षेत्रों से गुजरते हुए वह ओंकारेश्वर पहुंच रही हैं. वहां तथा उज्जैन में भगवान शिव को जल अर्पित करने के बाद वह सुल्तानगंज पहुंचेंगी और फिर बाबाधाम के लिए पैदल यात्रा शुरू करेंगी. उन्होंने बताया कि नर्मदा का प्रत्येक कंकड़ शिवलिंग स्वरूप माना जाता है.

38 वर्षों तक लगातार चढ़ाई डाक कांवर

माता बम की शिवभक्ति का सबसे चर्चित अध्याय 38 वर्षों तक सावन के प्रत्येक सोमवार डाक कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचना रहा है. वर्ष 2019 में बाबा मंदिर के गर्भगृह में जलाभिषेक नहीं कर पाने के बाद उन्होंने डाक कांवर यात्रा को विराम दे दिया था. इसके बावजूद उनकी शिवभक्ति और साधना आज भी उसी समर्पण के साथ जारी है.

दंडवत यात्रा से लेकर वैष्णो देवी तक का अद्भुत सफर

वर्ष 1985 और 2004 में सावन के नौ सोमवार पड़ने पर माता बम ने सभी नौ सोमवारी में डाक कांवर चढ़ाकर अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया था. वर्ष 2006 में उन्होंने सुल्तानगंज से बाबाधाम तक दंडवत यात्रा पूरी की. इसके अलावा वह मुजफ्फरपुर से साइकिल द्वारा 11 बार वैष्णो देवी, एक बार कामाख्या धाम तथा 11 बार ओंकारेश्वर और उज्जैन की पैदल यात्रा भी कर चुकी हैं.

श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का प्रतीक

श्रद्धालु कृष्णा बम को गहरी श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखते हैं. अनेक भक्त उन्हें मां पार्वती का स्वरूप मानते हुए उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए घंटों प्रतीक्षा करते हैं. कठिन साधना, अनुशासित जीवन और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट आस्था आज भी लाखों शिवभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.


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लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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