सांसद गिरिधारी यादव के तीन ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी से गरमाई सियासत, बोले- ‘लोकतंत्र की हत्या’; SP ने आरोपों को बताया निराधार

बांका सांसद गिरिधारी यादव के तीन ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी से जिले की सियासत में उबाल आ गया है. सांसद ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है, जबकि पुलिस अधीक्षक ने आरोपों को निराधार बताया है. इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

Banka News: बांका सांसद गिरिधारी यादव के तीन आवासों पर पुलिस की छापेमारी को लेकर रविवार को जिले की सियासत गरमा गयी. सांसद ने सिंचाई भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी अमितेश कुमार के आदेश पर पुलिस ने उनके पैतृक आवास बरौधिया, चांदन स्थित आवास और देवघर स्थित आवास पर अलग-अलग समय में छापेमारी की.

सांसद का कहना है कि पुलिस उनके घरों पर उन्हें तलाशने पहुंची थी. वहीं, बांका एसपी अमितेश कुमार ने सांसद के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि पुलिस की कार्रवाई सरकारी भूमि से अवैध मिट्टी खनन के मामले में दर्ज प्राथमिकी को लेकर की गयी है और इस मामले का सांसद से कोई लेना-देना नहीं है.

तीन ठिकानों पर पहुंची पुलिस, सांसद ने उठाये सवाल

गिरिधारी यादव ने बताया कि पुलिस पहले उनके पैतृक आवास बरौधिया पहुंची. इसके बाद चांदन स्थित आवास और फिर देवघर स्थित आवास पर भी पुलिस के पहुंचने की बात उन्होंने कही.

सांसद के अनुसार, छापेमारी से एक-दो दिन पहले वह समाहरणालय में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में मौजूद थे. ऐसे में यदि पुलिस को उनसे पूछताछ करनी थी या किसी मामले में उनकी जरूरत थी, तो उन्हें सीधे फोन किया जा सकता था.

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर एसपी को फोन किया, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं किया गया. इसके बाद लेटर पैड के माध्यम से एसपी से मिलने का समय मांगा गया, लेकिन उन्हें मिलने का समय भी नहीं दिया गया.

‘मेरे खिलाफ कोई मुकदमा नहीं, फिर घर पर क्यों पहुंची पुलिस?’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद ने कहा कि उनके खिलाफ या उनके परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ 107 की कार्रवाई तक नहीं हुई है.

गिरिधारी यादव ने सवाल उठाया कि जब पुलिस किसी जनप्रतिनिधि के घर इस तरह पहुंच सकती है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी. उन्होंने कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई से उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.

सांसद के मुताबिक, उनके पैतृक आवास पर जब पुलिस पहुंची, उस समय घर में महिलाएं मौजूद थीं. उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी वारंट या वैध आदेश के पुलिस किसी के घर पर इस तरह कैसे पहुंच सकती है.

देवघर वाले आवास पर भी पहुंची पुलिस

सांसद ने दावा किया कि देवघर स्थित उनके आवास पर देर रात पुलिस पहुंची. उस समय घर में केवल महिलाएं मौजूद थीं. सांसद के अनुसार, पुलिसकर्मी पानी पीने के बहाने वहां पहुंचे थे.

उन्होंने कहा कि उनका परिवार किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि से दूर रहा है. उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया.

‘एसपी ने फोन नहीं उठाया, यह गंभीर सवाल’

सांसद ने एसपी के फोन नहीं उठाने को भी गंभीर मुद्दा बताया. उनका कहना था कि यदि किसी सांसद को अपनी ही पुलिस से बात करने के लिए इस तरह प्रयास करना पड़े, तो आम लोगों की शिकायतों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत डीआईजी से की है और पुलिस द्वारा की गयी छापेमारी की जांच की मांग की है. सांसद ने चेतावनी दी कि यदि बिहार पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार से उन्हें न्याय नहीं मिलता है, तो वह इस मामले को संसद में भी उठायेंगे.

2005 की घटना का भी किया जिक्र

प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने वर्ष 2005 की एक घटना का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि उस समय उन पर हमला हुआ था, जिसमें उनके चालक की मौत हो गयी थी. उस घटना में सूचना मिलने के बाद पुलिस की पूरी टीम मौके पर पहुंची थी और उनकी जान बचायी गयी थी.

सांसद ने कहा कि वर्तमान कार्रवाई को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.

Banka News: पुलिस ने बताया- सांसद से कोई लेना-देना नहीं

वहीं, बांका एसपी अमितेश कुमार ने सांसद के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया. उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि से अवैध मिट्टी खनन के मामले में प्रिंस कंट्रक्शन के संवेदक लालधारी यादव, औंकार यादव और मुंशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है.

एसपी के अनुसार, इसी मामले को लेकर पुलिस ने छापेमारी की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में सांसद गिरिधारी यादव का कोई लेना-देना नहीं है.

इस तरह एक तरफ सांसद ने पुलिस कार्रवाई को अपनी प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं पुलिस ने कार्रवाई को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा नियमित कानूनी कदम बताया है. अब इस मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की छापेमारी किन आरोपियों की तलाश में की गयी थी और कार्रवाई की पूरी कानूनी प्रक्रिया क्या रही.

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लेखक के बारे में

By सुभाष वैद्य

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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