Fake Robbery Case: बांका में नकली लूट कांड का खुलासा, CSP संचालक समेत तीन गिरफ्तार

Fake Robbery Case: बांका जिले में दो मई को हुई एक बड़ी लूट की घटना ने तब नया मोड़ ले लिया जब पुलिस जांच में यह पूरी साजिश नकली निकली. सीएसपी संचालक ने अपने ही भांजे और भतीजे के साथ मिलकर 4 लाख 66 हजार रुपये की फर्जी लूट की कहानी रची थी ताकि बीमा क्लेम लिया जा सके.

Fake Robbery Case, चंदन कुमार, बांका: बांका जिले के सदर थाना क्षेत्र में 2 मई को एक बड़ी लूट की झूठी कहानी का खुलासा हुआ है. यहां के सीएसपी (कस्टमर सर्विस प्वाइंट) संचालक सुनील कुमार चौधरी ने खुद ही अपने भांजे और भतीजे के साथ मिलकर 4 लाख 66 हजार रुपये की लूट की साजिश रची थी. सुनील ने पुलिस को बताया था कि वह बांका से एडीवी बैंक से पैसे लेकर जा रहा था तभी घुटिया मोड़ के पास चार लोगों ने हथियार दिखाकर उससे पैसे और मोबाइल छीन लिए.

पुलिस ने क्या खुलासा किया

पुलिस ने जब मामले की जांच की तो सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि असली लुटेरे कोई और नहीं बल्कि खुद सुनील और उसके रिश्तेदार थे. फुटेज में देखा गया कि सुनील ने पैसे अपने भांजे की बाइक की डिक्की में रखे और मोबाइल लूट की बात भी झूठी साबित हुई क्योंकि घटना स्थल पर उनका मोबाइल लोकेशन नहीं मिला.

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इसलिए बनाई झूठी कहानी

पूछताछ में तीनों ने कबूल किया कि उन्होंने बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए यह झूठी लूट की कहानी बनाई थी. पुलिस ने सुनील, कृष्ण कुमार और आशुतोष आनंद को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया. जांच में यह भी सामने आया कि 3 लाख रुपये सीएसपी के ग्राहकों को दे दिए गए थे. 1.5 लाख रुपये शादी की तैयारी में खर्च किए गए और 16 हजार रुपये नकद पुलिस ने बरामद कर लिए. पुलिस ने कहा कि आरोपियों को सख्त सजा दिलवाई जाएगी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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