सूर्यदेव मंदिर से तेलडीहा शक्तिपीठ तक उमड़ी आस्था, पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की लगी भीड़
Banka News : रविवार की सुबह जिले में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. कहीं श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की, तो कहीं सिद्धपीठ तेलडीहा दुर्गा मंदिर में माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं.
बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट
Banka News : बांका जिले में रविवार को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. शहर के अलीगंज मोहल्ला स्थित सूर्यदेव मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया. वहीं शंभुगंज प्रखंड स्थित प्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ तेलडीहा दुर्गा मंदिर में भी जिले सहित आसपास के कई जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा कर अपनी मनोकामनाएं मांगी.
सूर्यदेव मंदिर में सुबह से जुटने लगे श्रद्धालु
शहर के अलीगंज मोहल्ला स्थित चांदन नदी तट के समीप भगवान सूर्यदेव मंदिर में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चांदन नदी में पवित्र स्नान कर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की.
उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि
श्रद्धालुओं ने सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और रोली अर्पित कर भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया. मान्यता के अनुसार सूर्य उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्यता प्राप्त होती है. मंदिर का पट सुबह पांच बजे खोल दिया गया था, जिसके बाद दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा.
अन्य मंदिरों में भी दिखी धार्मिक आस्था
सूर्यदेव मंदिर के अलावा शहर के विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की. छुट्टी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया.
तेलडीहा शक्तिपीठ में भक्तों की लगी कतार
शंभुगंज प्रखंड क्षेत्र में बांका और मुंगेर जिले की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तेलडीहा दुर्गा मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई. जिले के अलावा आसपास के कई क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की.
तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध है मंदिर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तेलडीहा दुर्गा मंदिर एक सिद्धपीठ तांत्रिक शक्तिपीठ है. कहा जाता है कि मंदिर की स्थापना तांत्रिक विधि से मुंड पर की गई थी. शारदीय नवरात्र के दौरान तांत्रिक अष्टमी पर साधक यहां पहुंचकर तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए विशेष साधना करते हैं.
सच्चे मन से मांगी गई मुराद होती है पूरी
स्थानीय मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से माता की पूजा-अर्चना कर मनोकामना मांगते हैं, उनकी इच्छा अवश्य पूरी होती है. मनोकामना पूर्ण होने पर कई श्रद्धालु यहां आकर पाठा बलि भी अर्पित करते हैं.
विशेष परंपरा के अनुसार खुलता और बंद होता है मंदिर
मंदिर के पुजारी श्याम आचार्य ने बताया कि प्रतिदिन सुबह मेढ़पति परिवार के सदस्यों द्वारा पूजा-अर्चना किए जाने के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का पट खोला जाता है. दिनभर पूजा-अर्चना के बाद शाम में आरती सम्पन्न होने पर मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है.
शारदीय नवरात्र में बढ़ जाता है मंदिर का महत्व
तेलडीहा दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु और साधक यहां पहुंचते हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है.