मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति का आरोप, जलमीनार भी नहीं दे रही साथ
पंजवारा. अप्रैल की शुरुआत के साथ ही बढ़ती गर्मी ने पंजवारा पंचायत में पेयजल संकट को विकराल बना दिया है. तापमान 36 डिग्री के पार पहुंचते ही हालात यह हो गये हैं कि लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है. पीएचईडी विभाग की सुस्ती और गिरते भूजल स्तर ने समस्या को और गंभीर बना दिया है.चापाकल खराब, पानी के लिए त्राहिमाम
पंचायत के विभिन्न वार्डों में अधिकांश चापाकल महीनों से खराब पड़े हैं. कई टोलों में चार से छह महीने से चापाकल बेकार हैं, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही हैं. लोगों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है.जलमीनार भी बनी शोपीस
क्षेत्र में लगी जलमीनार भी लोगों को राहत नहीं दे पा रही हैं. बिजली की आंख-मिचौनी और तकनीकी खराबी के कारण जलापूर्ति ठप है, जिससे जलमीनार ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहे हैं.दूषित पानी से बढ़ा खतरा
जो कुछ चापाकल चालू हैं, उनसे गंदा और लाल पानी निकल रहा है, इससे ग्रामीणों में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गयी है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई मोहल्लों में चापाकल बंद रहने के कारण उन्हें निजी बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है या दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है. वहीं, बस पड़ाव और सार्वजनिक स्थलों पर भी एक भी चापाकल चालू नहीं रहने से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है.खराब चापाकलों की सूची तैयार कर ली गयी है. मरम्मत कार्य के लिए टीम को सक्रिय कर दिया गया है और जल्द ही सभी चापाकलों को दुरुस्त कर पेयजल आपूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जायेगा.
