बिक्रमपुर मोड़ बना ‘डेथ टर्न’, हर हफ्ते हादसे, फिर भी प्रशासन बेखबर

Banka News : तेज रफ्तार, तीखा मोड़ और सुरक्षा इंतजामों का अभाव… पंजवारा-बांका मुख्य मार्ग का बिक्रमपुर मोड़ अब लोगों के लिए डर का दूसरा नाम बनता जा रहा है. स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब जागेगा प्रशासन?

पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट : बांका जिले के पंजवारा-बांका मुख्य मार्ग स्थित बिक्रमपुर मोड़ पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. तीखे मोड़, तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा उपायों की कमी के कारण यह इलाका हादसों का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है. स्थानीय नागरिक अब यहां स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक और बेहतर यात्री शेड की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं.

रात होते ही बढ़ जाता है खतरा

ग्रामीणों के अनुसार बिक्रमपुर मोड़ दिन की तुलना में रात के समय ज्यादा खतरनाक साबित होता है. सड़क पर पर्याप्त रिफ्लेक्टर, संकेत बोर्ड और स्पीड कंट्रोल व्यवस्था नहीं होने के कारण बाहर से आने वाले वाहन चालक अचानक मोड़ का अंदाजा नहीं लगा पाते. तेज रफ्तार में वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं और दुर्घटनाएं हो जाती हैं.

कुछ महीनों में हुए हैं कई बड़े हादसे

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में यहां कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं. हाल ही में यात्री शेड के पास हुई दुर्घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था. इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

जर्जर यात्री शेड बना परेशानी का कारण

सड़क सुरक्षा के साथ-साथ यहां मौजूद यात्री शेड की स्थिति भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. ग्रामीण बताते हैं कि यात्री शेड काफी जर्जर हो चुका है और उसमें यात्रियों के बैठने या बारिश और धूप से बचने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.

बारिश के दिनों में होती है दिक्कत

स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान होते हैं. बारिश के दिनों में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है, जबकि गर्मी में तेज धूप से राहत पाने का कोई इंतजाम नहीं है.

ग्रामीणों ने रखी ये बड़ी मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग से बिक्रमपुर मोड़ को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यहां तत्काल स्पीड ब्रेकर, हाई विजिबिलिटी रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और सड़क सुरक्षा संकेतक लगाए जाने चाहिए.

यात्री शेड के निर्माण की भी उठी माग

इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक और सुरक्षित यात्री शेड के निर्माण की भी मांग उठ रही है. ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यहां और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं.

लोगों में बढ़ रहा आक्रोश

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई दिखनी चाहिए.

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Author: AMIT KUMAR SINH

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