बांका. बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तक कृषि सेवाएं आसानी से पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे एग्रीटेक स्टार्टअप जीआरओओ एग्री का बिहार सरकार की बिहार स्टार्टअप नीति 2022 के तहत सीड फंडिंग के लिए चयन हुआ है. उद्योग विभाग ने स्टार्टअप के प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल के मूल्यांकन के बाद यह स्वीकृति दी है. सरकारी समर्थन मिलने के बाद अब किसानों के लिए डिजिटल कृषि सेवाओं का दायरा बढ़ाने की तैयारी है.
ट्रैक्टर से ड्रोन तक, मोबाइल से बुक होंगी कृषि सेवाएं
जीआरओओ एग्री का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी जरूरी सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है. इसके जरिए किसान मोबाइल से ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर और सीड ड्रिल जैसी कृषि मशीनरी बुक कर सकेंगे. इसके अलावा ड्रोन से फसल में छिड़काव, बोरवेल, मिट्टी जांच और दूसरी कृषि सेवाओं को भी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है. इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकने के बजाय एक ही डिजिटल माध्यम से जरूरत के अनुसार सुविधा लेने में मदद मिलेगी.
किसान परिवार के युवा चिन्मय आनंद ने शुरू की पहल
जीआरओओ एग्री की शुरुआत बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड के गुलनी कुशाहा गांव निवासी युवा चिन्मय आनंद ने की है. किसान परिवार से आने वाले चिन्मय ने खेती से जुड़ी समस्याओं को करीब से देखा है. इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने तकनीक के माध्यम से किसानों की मुश्किलें कम करने की दिशा में काम शुरू किया. उनका प्रयास कृषि मशीनरी और दूसरी जरूरी सेवाओं को ग्रामीण किसानों के लिए अधिक सुलभ बनाने पर केंद्रित है.
खेत में मशीन चाहिए तो मोबाइल से मिलेगी सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम किसानों के सामने कृषि मशीनरी की उपलब्धता बड़ी चुनौती रहती है. कई बार किसान जरूरत के समय ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या अन्य उपकरण की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं. जीआरओओ एग्री का प्लेटफॉर्म इसी समस्या को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है. किसान अपनी जरूरत के अनुसार मशीनरी या सेवा का चयन कर मोबाइल के माध्यम से बुकिंग कर सकेंगे. इससे कृषि कार्यों के लिए जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है.
आगे कृषि सामग्री और मौसम की जानकारी भी जोड़ने की तैयारी
जीआरओओ एग्री की योजना केवल मशीनरी और कृषि सेवाओं तक सीमित नहीं है. आगे प्लेटफॉर्म पर कृषि सामग्री, मिट्टी जांच और मौसम संबंधी जानकारी जैसी सुविधाएं भी जोड़ने की तैयारी है. इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि सलाह को भी प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनाने की योजना है. इससे किसानों को फसल और खेती से जुड़े फैसलों में तकनीक आधारित जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.
सीड फंडिंग से बढ़ेगा ग्रामीण कृषि सेवाओं का दायरा
बिहार स्टार्टअप नीति 2022 के तहत सीड फंडिंग के लिए चयन को जीआरओओ एग्री की ग्रामीण कृषि सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. उद्योग विभाग की ओर से स्टार्टअप के प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल के मूल्यांकन के बाद यह स्वीकृति दी गयी है. सरकारी सहयोग मिलने से तकनीक आधारित कृषि सेवाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने और किसानों की रोजमर्रा की कृषि जरूरतों को डिजिटल माध्यम से पूरा करने की पहल को गति मिलने की उम्मीद है.
बांका से निकलकर किसानों तक पहुंचने की कोशिश
शंभुगंज के गुलनी कुशाहा जैसे ग्रामीण इलाके से शुरू हुई यह पहल स्थानीय स्तर की कृषि समस्याओं को तकनीक से जोड़ने की कोशिश है. किसान परिवार से आने वाले चिन्मय आनंद ने खेती की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की पहल की है. अब सरकारी सीड फंडिंग के लिए चयन के बाद जीआरओओ एग्री के सामने इस मॉडल को अधिक किसानों तक पहुंचाने और कृषि सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर विस्तार देने की चुनौती और अवसर दोनों हैं.
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