शहर में नहीं हैं पर्याप्त शौचालय

जागरूकता का अभाव . ओढ़नी व चांदन नदी तट पर खुले में शौच बनी मजबूरी शहर की एक बड़ी आबादी अब भी शौचालय विहीन है. इसमें सुधार के िलए नपं को 1854 शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला है. जानकारी के अनुसार यहां अब तक मात्र 295 शौचालय बने हैं. बांका : सरकार ने जिले को […]

जागरूकता का अभाव . ओढ़नी व चांदन नदी तट पर खुले में शौच बनी मजबूरी

शहर की एक बड़ी आबादी अब भी शौचालय विहीन है. इसमें सुधार के िलए नपं को 1854 शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला है. जानकारी के अनुसार यहां अब तक मात्र 295 शौचालय बने हैं.
बांका : सरकार ने जिले को जहां 2019 तक खुले में शौचमुक्त करने का अभियान चला रखा है. वहीं बांका नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन को ग्रहण लगा है. यहां करीब 5 हजार से अधिक ऐसे परिवार हैं, जिनके पास शौचालय नहीं है. शहर की एक बड़ी आबादी दिन में भी खुले में शौच जाने को विवश है. ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन के इस अभियान में शहरी आबादी को भी लाभ प्राप्त नहीं हो सका है. शहर की आबादी का एक बड़ा हिस्सा नित्य प्रतिदिन खुले में शौच के लिए शहर के ओढ़नी व चांदन नदी तट का सहारा लेते है. जो सिलसिला यहां अनवरत जारी है.
जागरूकता का है अभाव : स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण कार्य के लिए जहां नगर पंचायत उदासीन बना हुआ है. वहीं जागरूकता के आभाव में नपं कार्यालय में लाभुकों का भी आवेदन भी कम आ रहा है. अब तक मात्र 693 लाभुकों का ही आवेदन नपं कार्यालय को प्राप्त हुआ है. ऐसे में यह योजना जमीनी स्वरूप नहीं ले पा रहीं है. हलांकि लाभुक एवं नपं के अधिकारी का इस मामले में अलग-अलग तर्क है. कुल मिलाकर योजना के कार्य रूप देने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की बात सामने आ रहीं है. अधिकतर लाभुकों का कहना है कि इस योजना में बिचौलिया संस्कृति भी हावी है.
जियो टैग पर सर्च के बाद मिलती है राशि
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पंचायत क्षेत्र में एक लाभुक को शौचालय निर्माण के लिए दो किस्तों में कुल 12 हजार की राशि दी जाती है. प्रथम किस्त में लाभुक के द्वारा टंकी की खुदाई कार्य करने के बाद 7 हजार 500 एवं द्वितीय व अंतिम किस्त के रूप में 4 हजार 500 रूपया दिया जाता है. लाभुक के द्वारा शौचालय निर्माण कार्य पूरा करने के बाद शौचालय का फोटो विभाग को जमा करना होता है. पटना स्थित विभाग में उक्त शौचालय का जियो टैग में सर्च के बाद इनकी पुष्टि होती है उसके बाद दूसरी किस्त का राशि भुगतान कर दिया जाता है.
क्या है जमीनी हकीकत : स्वच्छ भारत मिशन शहरी के तहत 2016-17 में विभाग के द्वारा नगर पंचायत को शौचालय निर्माण के लिए 1854 यूनिट का लक्ष्य मिला है. जिसमें अब तक नगर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डो में मात्र 295 लाभुकों का ही शौचालय निर्माण कार्य पूरा हुआ है. शेष शौचालय निर्माण अधर में लटका हुआ है. इसको लेकर नगर पंचायत क्षेत्र के वंचित लाभुकों का कहना है कि नगर पंचायत के द्वारा शौचालय निर्माण में मिलने वाली सहायता राशि में विभागीय प्रक्रिया लंबी है. जिसके कारण लोग चाह कर भी इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
शौचालय निर्माण के लिए समय-समय पर विभाग द्वारा क्षेत्र में प्रचार-प्रसार जारी है. पर, लोगों की मानसिकता अब भी नहीं बदल पायी है. बावजूद विभाग ससमय लक्ष्य पूरा कर लेगा. उन्होंने शहरवासियों से शौचालय निर्माण कार्य के लिए सरकार के द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि का लाभ लेने की अपील की है.
बीके तरूण, कार्यपालक पदाधिकारी, नपं

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