बोनस व ग्रेच्युटी पर मजदूरों के लिए सीमा क्यों : प्रदेश अध्यक्ष

बोनस व ग्रेच्युटी पर मजदूरों के लिए सीमा क्यों : प्रदेश अध्यक्ष बौंसी : इंटक के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा है कि 2009 में देश में मजूदर आंदोलन के बाद मजूदर संगठनों में एकजूटता आयी जिसके बाद मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए संगठनों ने मिलकर काम करना शुरु किया. बोनस एवं […]

बोनस व ग्रेच्युटी पर मजदूरों के लिए सीमा क्यों : प्रदेश अध्यक्ष

बौंसी : इंटक के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा है कि 2009 में देश में मजूदर आंदोलन के बाद मजूदर संगठनों में एकजूटता आयी जिसके बाद मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए संगठनों ने मिलकर काम करना शुरु किया. बोनस एवं ग्रेच्युटी पर मजदूरों के लिए कोई सीमा क्यों है बाकी लोगों के लिए क्यों नही है. मुनाफे पर सीलिंग क्यों नहीं लगाया जा रहा है. गरीबी रेखा से नीचे करीब 30 करोड़ लोग हैं जबकि सरकार द्वारा 88 करोड़ लोगों की सुची बनायी गयी है. केन्द्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बिना की पूर्व के तैयारी के नोटबंदी लागु कर दिये इसके लिए कोई कानून नहीं बनाया गया.
जबकि बिहार सरकार ने शराब बंदी कानून बनाकर लागु किया. सरकार ने अपने पूरे संसाधन को इसे लागु करने में लगा दिया. जिससे सरकार का वोट बैंक बना रहे. हालांकि उन्होंने सरकार की नोटबंदी व शराब बंदी को सराहनीय कदम करार दिया. किसानों के हित की बात करते हुए कहा कि आज किसान भी अपने आप को ठगे महसूस कर रहे हैं. देश का किसान भी परेशान है. सब्जियों और फलों के दाम बढ़ने पर हंगामा होता है जबकि किसानों को उसके उत्पाद का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा. हर साल बीस हजार करोड़ का एनपीए हो रहा है पर यह किसको जा रहा है. कृषि उद्योग को बढ़ावा नहीं मिल रहा है. वहीं जो वर्ग ताकतवर है वह दया का पात्र है ओर मजदूर जो सबसे कमजोर वर्ग है उसे देखने वाला भी कोई नहीं है. मनरेगा के संबंध मे कहा कि लुट अगर देखनी हो तो मनरेगा के कार्यों में देखें.

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