अस्पताल को लगा लाइलाज रोग

विडंबना. जिले के कई अस्पतालों में सृजित पद के अनुसार चिकित्सक नहीं राज्य सरकार जहां बेहतर से बेहतर चिकित्सा के लिए कटिबद्ध है वहीं जिले के सदर अस्पताल सहित कई अस्पताल चिकित्सक का अभाव झेल रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना धरातल पर नहीं दिख रही है. बांका : निजी अस्पताल के […]

विडंबना. जिले के कई अस्पतालों में सृजित पद के अनुसार चिकित्सक नहीं
राज्य सरकार जहां बेहतर से बेहतर चिकित्सा के लिए कटिबद्ध है वहीं जिले के सदर अस्पताल सहित कई अस्पताल चिकित्सक का अभाव झेल रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना धरातल पर नहीं दिख रही है.
बांका : निजी अस्पताल के तर्ज पर सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर सुविधाएं मरीजों को मुहैया करायी जा रही है. राज्य सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को देखते हुए जिला अस्पताल सहित विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है.
ज्ञात हो कि जिले भर के जितने भी अस्पताल रेफरल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. उनमें चिकित्सकों के जितने पद सृजित है. उतने चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं है. बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में भीड़ उमड़ रही है. अस्पताल में उमड़ती भीड़ के बीच अस्पताल के बेहतर प्रबंधन एवं कई आवश्यक सेवाओं की कमी के कारण अक्सर अस्पताल के मरीजों का सही से देखभाल नहीं हो रहा है. जिसके कारण जाने अंजाने में कई मौतों का गवाह अस्पताल बन रहा है और अस्पताल प्रबंधन मृतक परिजनों के कोप का भाजन बन रहे हैं.
जिला अस्पताल होने के बाद भी यहां पर बहुत सारे विभाग के चिकित्सक उपलब्ध नहीं है और न ही अत्याधुनिक एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी ही उपलब्ध है. हालांकि जो मशीन अस्पताल में उपलब्ध है उसके चिकित्सक नहीं रहने से वो मशीनें जंग खा रही है. जिसे देखने वाला कोई नहीं है. जिला को बने 25 वर्ष बीत चुके हैं. जिला अस्पताल में अब तक आईसीयू वार्ड चालू नहीं हो पाया है और ना ही सीएनसीयू वार्ड ही चालू हो पाया है. जिस कारण गंभीर रूप से पहुंचे बीमार मरीजों को तुरंत भागलपुर रेफर कर दिया जाता है. जिले भर के आकड़े को ध्यान दे तो सिर्फ जिला अस्पताल में ही साल भर में जच्चा-बच्चा समेत सभी तरह की कुल 43 मौतें हो चुकी है. कमोवेश यह साल अस्पताल के लिए ठीक नहीं रहा है.
कम कर्मियों में भी अस्पताल पहुंचे मरीजों को बेहतर सुविधा दिया जा रहा है. जरूरी दवाईयां उपलब्ध करायी जा रही है. अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों की ही मौत अस्पताल में हो सकती है. यहां पर नसबंदी, हॉनिया सहित कई प्रकार के शल्य चिकित्सा आसानी से हो रहे हैं.
एस के महतो, सीएस, बांका

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