जर्जर भवन में पढ़ने को विवश हैं बच्चे
तीन कमरों वाले पपरेवा स्कूल के दो कमरे तो इतना जर्जर हैं कि उसमें सिर्फ लकड़ी रखने व बच्चों को बैठा कर एमडीएम ही खिलाया जाता है़ शेष एक कमरा व बरामदा पर बहुवर्गीय कक्षा आयोजित कर बच्चों को जैसे-तैसे पढ़ाया जा रहा है़
कटोरिया : प्रखंड के देवासी पंचायत अंतर्गत न्यू प्राथमिक विद्यालय पपरेवा के जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डाल कर सवा सौ छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने को मजबूर हैं. नया स्कूल भवन निर्माण के लिए सर्व शिक्षा अभियान बांका द्वारा साढ़े आठ लाख रुपये आवंटित भी किये गये़ लेकिन स्थल चयन को लेकर गांव के ही ग्रामीणों के दो पक्षों में विवाद हो गया़ उक्त विवाद को सुलझाने की दिशा में शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने दिलचस्पी नहीं ली, जिस कारण लगभग दो साल पहले ही आवंटित राशि जिला मुख्यालय को लौटा दी गयी है़ जर्जर हो चुके विद्यालय की छत से सीमेंट का टुकड़ा बराबर गिरते रहता है़
कुछ बच्चों को इससे चोट भी आ चुकी है़ विद्यालय परिसर में लगे चापाकल से भी स्वच्छ पानी नहीं निकलता़ जंग खा चुकी पाईप से काफी गंदा पानी निकलता है़ इसी पानी से एमडीएम बनने की वजह से बच्चे खाना रूचि से नहीं खाते़ प्यास लगने पर विद्यालय की चहारदिवारी से दूर स्थित चापाकल या घर जाकर ही बच्चे पानी पीते हैं. विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्वाति कुमारी ने बताया कि विद्यालय के जर्जर भवन के नीचे ही वह भी जान खतरे में डाल कर बच्चों को पढ़ाने को विवश हैं.
विद्यालय के बच्चे कंचन कुमारी, बेबी कुमारी, कौशल्या कुमारी, कल्पना कुमारी, मोहिनी, राधा, रंजू, अनुराधा, प्रियंका, भोला, नीतीश, डबलू, योगेंद्र आदि ने जिलाधिकारी से शीघ्र नया भवन निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है़ इस संबंध में शिक्षा विभाग के जिला मुख्यालय स्थित कार्यालय में कई बार रिपोर्ट भी की जा चुकी है़
