बांका : बांका सदर थाना क्षेत्र के लीलावरण गांव में बुधवार को इसी गांव के दो स्कूली बच्चों की मौत बिजली के करंट लगने से हो गयी. दोनों बच्चे इसी गांव के जहरथान टोले के थे और लीलावरण प्रोन्नत मध्य विद्यालय में कक्षा छह के छात्र थे. इनमें से एक गांव के घोघो टुडू का 12 वर्षीय पुत्र संतोष टुडू व दूसरा शुकर देवी का 13 वर्षीय पुत्र सोमरा मुर्मू था. उनकी मौत स्कूल के पास बहियार में गिरे 11 केवीए की बिजली तार की चपेट में आकर हुई. घटना के बाद स्कूल और गांव में मातम का माहौल हैं.
खेलने के लिए खेत में गये थे छात्र : बुधवार को विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति अन्य दिनों की ही तरह थी. दोपहर मध्याह्न भोजन अवकाश के दौरान उन्होंने
करंट से दो…
सामूहिक भोजन किया और इसके बाद पास ही खेलने लगे. खेलते हुए कुछ बच्चे पास के खेतों की ओर निकल गये. उन्हें पता नहीं था कि इन्हीं खेतों से होकर गुजरने वाला 11 केवीए का बिजली तार खेतों में गिरा है. खेलते हुए दो बच्चे संतोष व सोमरा इस उच्च धारा युक्त विद्युत तार से जा सटे. इसके बाद जोर की चिंगारी उठी और आग की लपटें देखते ही देखते उन्हें जला कर खाक कर गयी.
गरीब व मजदूर परिवार के थे दोनों बच्चे
इस घटना में कई और बच्चों की जानें जा सकती थी, लेकिन इन बच्चों की चीख सुन कर उनके पीछे जा रहे अन्य बच्चे चिल्लाते हुए वापस लौट गये. उन्होंने विद्यालय में जाकर शिक्षकों से कहा. सभी लोग घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े. लेकिन तब तक सब कुछ समाप्त हो चुका था. घटना की जानकारी पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची और लाश को पोस्टमार्टम के लिए बांका भेजा. इस घटना में जान गंवाने वाले दोनों बच्चे गरीब व मजदूर परिवारों के है. सोमरा मुर्मू को पिता नहीं है. वह अपनी मां की उम्मीद था. इस घटना से विद्यालय परिवार व समूचा गांव मर्माहत है. गांव में मातमी सन्नाटा कायम है.
लापरवाही के शिकार बने बच्चे
लापरवाही दो बच्चे के लिए काल बन गयी. लापरवाही विद्यालय की भी और बिजली विभाग की भी. लीलावरण बहियार में कई दिनों से 11 केवीए का तार गिरा था. गांव की लगभग पूरी आबादी गरीब व मजदूर तबके की है. उन्होंने बहियार में तार गिरने की सूचना विभाग को दे रखी थी. लेकिन विभाग इस ओर से लापरवाह रहा क्योंकि सूचना देनेवाले लो प्रोफाइल लोग थे. दूसरी लापरवाही विद्यालय की रही. विद्यालय प्रबंधन को इस बात का या तो इल्म नहीं था या फिर उन्होंने बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को उनके भाग्य भरोसे छोड़ दिया कि विद्यालय के आस-पास कोई खतरा है और बच्चों की उससे जान जा सकती है. बुधवार को मध्याह्न भोजन के बाद बच्चे जब खेलते हुए विद्यालय परिसर से दूर जा रहे थे तब अगर शिक्षक उन्हें रोक लेते तो यह हादसा नहीं होता.
