संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रहा अस्पताल – लोगों को नहीं मिल रहा समुचित चिकित्सा लाभ- बाजार क्षेत्र के लोगों ने बनाया कचरा फेंकने की जगह फोटो 17 बांका 5 : अस्पताल के समीप कचरे का ढेर प्रतिनिधि, फुल्लीडुमरसमुचित संख्या में डॉक्टरों एवं पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में फुल्लीडुमर प्रखंड के खेसर स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं स्वास्थ्य उप केंद्र दम तोड़ रहे हैं. खेसर बाजार में 1949 ई से ही देव नारायण राजकीय दातव्य चिकित्सालय के नाम से एक भवन है. इसके साथ ही 16 कट्ठा अतिरिक्त जमीन भी अस्पताल के नाम से निबंधित है. अपने कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व चंद्रशेखर सिंह ने इसी भवन में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा अतिरिक्त भूमि पर चिकित्सा कर्मियों के लिए निवास का निर्माण कराया था. हालांकि डॉक्टर का आवास अब तक अधूरा पड़ा है. जहां कचरे का ढेर लगा है. फलस्वरूप ईद-गिर्द कसबे के आवारा मवेशी अपना बसेरा बनाये हुए हैं. बाजार आने-जाने वाले जहां इस जगह को मुतूरालय बना रहे है वहीं बाजार के तमाम कचरे भी इसी जगह फेंके जाते है. अस्पताल में डॉक्टर का आना जाना नहीं के बराबर है और न ही कर्मचारी ही यहां आना गवारा करते हैं. कई बार कोई एएनएम आकर मरीजों को बगैर डॉक्टर की जांच हुए दवा बांट जाती है. कहते हैं प्रभारी चिकित्सक फुल्लीडुमर अस्पताल के प्रभारी डॉ विरेंद्र यादव कि फिलहाल अतिरिक्त डॉक्टरों और कर्मियों का नितांत अभाव है. जिससे मरीजों की समुचित सेवा कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है. ———-कायम है अंधेरा, आ रहा बिजली बिल फुल्लीडुमर. प्रखंड के खासाघोला महादलित गांव में पिछले कई माह से ट्रांसफॉर्मर जला पड़ा है. इससे गांव के उपभोक्ता अंधेरे में रहने को विवश हैं. जबकि विभाग द्वारा उन्हें बिल आना जारी हैं. इससे उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं. ग्रामीण अनिल रजक, मनटुन रजक, योगेंद्र रजक, बंधु राय, कैलाश मंडल आदि ने कहा कि इधर हाल में एक नया ट्रांसफॉर्मर गांव में लगाया गया है. जिससे कभी कभार ही उन्हें बिजली मिलती है. लेकिन जितने दिनों वे बिजली से वंचित रहे उस दौर का भी बिजली बिल उन्हें भेजा जा रहा है. ———ओवर लोडेड ट्रकों के परिचालन से सड़कें बदहाल, दुर्घटना की आशंका फोटो 17 बांका 6 : ओवरलोडेड ट्रक. फुल्लीडुमर. प्रखंड के रमसरिया मोड़ से खेसर बाजार होते हुए इंगलिश मोड़-अमरपुर-भागलपुर जाने वाली सड़क पर बालू लदे ट्रकों के परिचालन का सिलसिला तेज हो गया है. इससे इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ गयी है. खास कर शाम से लेकर करीब-करीब रात भर यह स्थिति कायम रहती है. इन ट्रकों के परिचालन की वजह से कई बार गंभीर दुर्घटनाएं भी हो चुकी है. इधर ओवर लोडेड ट्रकों के चलने से उक्त मार्ग जगह – जगह क्षतिग्रस्त हो गया है. कई जगह सड़क पर गड्डे बन गये है. जिससे इस मार्ग पर सवारी गांडि़यां और आम लोगों का आना जाना भी मुश्किल हो रहा है. कुछ दिनों पूर्व क्षेत्र के लोगों की शिकायत पर परिवहन विभाग ने इस पथ पर ट्रकों के परिचालन पर रोक लगायी थी, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई से कुछों दिनों बाद ट्रकों का परिचालन पुन: इस पथ पर शुरू हो गया है. उल्लेख है कि यह एक ऐसा पथ है जिनके किनारे फुल्लीडुमर से लेकर भागलपुर तक दर्जनों गांव बसे है. इन गांवों के लोगों खास कर बच्चों एवं मवेशियों के लिए ये ट्रक हमेशा खतरे का सबब बने हुए है.
संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रहा अस्पताल
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