बरकार है भैंसा का आंतक पंजवारा. थाना क्षेत्र के लौढ़िया एवं लखपुरा गांव सहित तकरीबन आधा दर्जन गांव के ग्रामीण इन दिनों एक भैंसे के आतंक से सहमे हुए हैं. अब तक दर्जन भर लोगों को अपना शिकार बना चुका आतंक का दूसरा रूप बन चुका है. दो दिन पूर्व ही इसके आतंक के कारण एक मजदूर को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया था. जब वो फसल की कटाई कर लौट रहा था तब भैंसे ने उसे अपना शिकार बना लिया था. मजदूर को भैंसे ने पटक पटक कर उसे इतने घाव दिये की उसकी मौत हो गयी. जिसके विरोध में ग्रामीणों ने दूसरे दिन भागलपुर गोड्डा मार्ग को घंटों बाधित कर दिया था. बाद में अंचलाधिकारी के साथ स्थानीय प्रशासन ने भैंसे को जंगल भेजने की बात कह कर किसी तरह जाम छोड़वाया था. लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है. आज भी लखपुरा और आस पड़ोस के ग्रामीण शाम ढलते ही अपने घरों में दुबक जाते हैं. अगर गाहे बगाहे किसी को अति आवश्यक काम से बाहर निकलना पड़ जाये तो यह काम किसी मुसीबत से कम नहीं जान पड़ता है. दूसरी तरह स्थानीय प्रशासन इस पर हाथ पर हाथ धरे एक और अनहोनी का जैसे इंतजार कर रहा है. इन सबके बीच ग्रामीणों का गुस्सा कभी भी प्रशासन के खिलाफ उठ सकता है.
बरकार है भैंसा का आंतक
बरकार है भैंसा का आंतक पंजवारा. थाना क्षेत्र के लौढ़िया एवं लखपुरा गांव सहित तकरीबन आधा दर्जन गांव के ग्रामीण इन दिनों एक भैंसे के आतंक से सहमे हुए हैं. अब तक दर्जन भर लोगों को अपना शिकार बना चुका आतंक का दूसरा रूप बन चुका है. दो दिन पूर्व ही इसके आतंक के कारण […]
