बालू के उत्खनन से छठ घाटों का स्वरूप बदला

बालू के उत्खनन से छठ घाटों का स्वरूप बदला घाटों पर जाने के रास्ते खराब रहने से लोगों को होगी परेशानीप्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिखाई छठ घाट की सफाई में रुचिबालू उत्खनन को लेकर प्रशासन को कोस रहे हैं ग्रामीणफोटो 14 बांका 9 : छठ घाट की तसवीर प्रतिनिधि, धोरैयाआज से छठ पूजा शुरू […]

बालू के उत्खनन से छठ घाटों का स्वरूप बदला घाटों पर जाने के रास्ते खराब रहने से लोगों को होगी परेशानीप्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिखाई छठ घाट की सफाई में रुचिबालू उत्खनन को लेकर प्रशासन को कोस रहे हैं ग्रामीणफोटो 14 बांका 9 : छठ घाट की तसवीर प्रतिनिधि, धोरैयाआज से छठ पूजा शुरू हो जायेगा, लेकिन क्षेत्र के छठ घाटों की स्थिति अबतक सामान्य नहीं हो पायी है़ स्थानीय ग्रामीण ही छठ घाटों को संवारने में लगे हैं. कमोवेश सभी घाटों पर गंदगी का अंबार है. बावजूद इसके प्रखंड प्रशासन पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है़ छठ घाटों की तरफ किसी का ध्यान नहीं है़ प्रखंड क्षेत्र में अधिकांश जगहों पर छोटी-छोटी नदियों में अर्घ्य दिया जाता है, लेकिन इस बार इन नदियों में पानी की किल्लत हो गयी है़ कुरमा ईदगाह के पीछे स्थित मिरचीनी नदी व बटसार के गहिरा नदी तट पर स्थित घाट की स्थिति बदहाल है़ बटसार छठ घाट पर आमतौर पर लोग गहिरा नदी के तट पर अर्घ्य देते हैं, जहां दो दिनों तक भीड़ लगी रहती है, लेकिन बालू के उत्खनन से नदी की हालत बिगड़ गयी है़ यही स्थिति मिरचीनी, गहिरा व गेरुआ नदी का भी है़ एक ओर जहां घाटों की स्थिति बेहद खतरनाक बनी हुई है. वहीं चारों तरफ गंदगी का अंबार है़ कुरमा घाट की स्थिति नारकीय बनी हुई है़ कुछ दिन पूर्व घाटों के निरीक्षण में पहुंचे सीओ व थानाध्यक्ष ने घाट किनारे लगाये गये ईंट भट‍्टे को हटाने का निर्देश देकर अपने दायित्व को पूरा कर दिया, लेकिन घाटों पर फैली गंदगी को हटवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली़ क्षेत्र के भतुआचक, सिज्झत आदि गांवों के नहर में लोग छठ का अर्घ्य देते हैं. इन नहरों में भी प्रशासन द्वारा डेम से पानी मुहैया नहीं कराया गया़ छठ घाटों के रास्ते पर भी प्रशासन का ध्यान अबतक नहीं गया है़ स्थानीय लोगों का मानना है कि छठ को लोग नेम व निष्ठा से करते हैं, लेकिन इन घाटों वाले व्रतियों को स्थानीय प्रशासन से कभी भी सहयोग नहीं मिलता है़ —इन घाटों पर जुटते हैं लोग क्षेत्र के चंदाडीह, जगता, कुषमी, ओडा बाजार, चांनपुर व भगवानपुर में व्रति तालाब व पोखर में, जबकि मलधरा, इटहरी, राजुपथार, उपरटोला कुशमी, कोतरा, धोरैया घसिया, श्रीपाथर, पटवा, मकेशर, जाखा, हिरंबी, कदमा, बडेरी पंठिया, गंगटी, दातिन, डेरु, गंगदौरी व गचिया गांव के व्रति डाला के साथ नदी में अर्घ्य देने पहुंचते हैं.

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