समाजिक सौहार्द का प्रतीक है मखनपुर का मसजिद

फोटो 22 बांका 15: मुखिया हाजी नसीर की फोटो लगाने की कोशिश करेंगे. विज्ञापन दाता हैं.प्रतिनिधि, बाराहाटप्रखंड क्षेत्र का मसजिदे महबुदिया मखनपुर कई ऊतार चढ़ाव देखने के बावजूद आज भी सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. वर्ष 1905 के पूर्व जीर्ण शीर्ण अवस्था में रहा मसजिद केवल समाज के श्रमदान से वर्ष 1958 आते […]

फोटो 22 बांका 15: मुखिया हाजी नसीर की फोटो लगाने की कोशिश करेंगे. विज्ञापन दाता हैं.प्रतिनिधि, बाराहाटप्रखंड क्षेत्र का मसजिदे महबुदिया मखनपुर कई ऊतार चढ़ाव देखने के बावजूद आज भी सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. वर्ष 1905 के पूर्व जीर्ण शीर्ण अवस्था में रहा मसजिद केवल समाज के श्रमदान से वर्ष 1958 आते आते अपनी भव्यता बिखेरने लगा था. नारायणपुर पंचायत के मुखिया हाजी नसीर जो आज भी इस मसजिद के सदर हैं ने बताया की मसजिद के निर्माण में जितना योगदान मुसलिम लोगों ने दिया उतना ही हिंदू लोगों ने इसके नव निर्माण के लिये बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. निर्माण के वक्त जिन हिंदू भाई के पास ईंट था उन्होंने मसजिद के लिये दान दिया. किसी परिवार ने श्रम दान देकर मसजिद बनाने में मदद की. वहीं मसजिद के सचिव मोहम्मद कफील ने बताया आज कल रमजान का पाक महीना है.मुसलमान लोग रोजा रख रहे हैं.रोज पांच वक्त का नमाज बड़े नेम निष्ठा से अता कर रहे हैं.जा सी भी चूक ना हो इसके लिये काफी ध्यान रखा जाता है.चर्चा के क्रम में उन्होंने बताया कि सुबह के 3:45 से फजर का वक्त शुरु होता है.तक रोजे दार पहली नमाज अता क रते हैं.उसके बाद 2:30 में जोहर के वक्त दूसरी नमाज के साथ ठीक 5:10 में असर की नमाज अता करने का नियम हैं.जबकी 6:41 पर मगरीद की नमाज अता करने के साथ रोजेदार रोजा तोड़ते हैं.और साथ में 8:45 मिनट पर रात में इशा की अंतिम नमाज अता की जाती है.रोजा रखने को लेकर पूरे परिवार में एक अलग तरह की खुशी छाई रहती है.ग्रामीण सहुल, अजीम, समशुल कोषाध्यक्ष मोहम्मद आजाद ने बताया की आज भी सब मिल कर हम पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आपसी भाई चारे को आगे बढ़ा रहे हैं.

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