धोरैया. धोरैया प्रखंड की सीमा पर स्थित पंजवारा से सन्हौला तक गेरूआ नदी से अत्यधिक बालू उठाव होने के कारण पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है़ दरअसल कृषि प्रधान क्षेत्र बांका के गेरूआ नदी में भारी पैमाने पर बालू उठाव के कारण नदी काफी गहरी हो गयी है़ पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण इलाके की दस हजार हेक्टेयर भूमि सिंचाई सुविधा से वंचित हो रही है. डाड़ हो गयी ऊंचीबालू उठाव के कारण नदियां काफी गहरी हो गयी है और डाड़ ऊपर. इससे नदी का पानी उंचे डांढ़ में नहीं चढ़ पाता है़ ज्यादा बालू उठाव होने के कारण नदी के तल पर घास उग आयी है़ इससे पता चलता है कि बालू का उठाव नदी के तल तक किया गया है़ बालू उठाव के कारण तटवर्ती गांवों में जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है़ जिससे वहां बसे लोग काफी चिंतित हैं़ बालू उठाव से पटवन की पुरानी व्यवस्था मीशली शैराबी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है़ जिस कारण पंजवारा से सन्हौला तक के मध्य स्थित धोरैया क्षेत्र गेरुआ नदी के किनारे बसे किसानों की हजारों एकड़ जमीन प्रभावित हो रही है.
बालू उठाव के कारण गहरी हो गयी नदी सिसक रहे किसान
धोरैया. धोरैया प्रखंड की सीमा पर स्थित पंजवारा से सन्हौला तक गेरूआ नदी से अत्यधिक बालू उठाव होने के कारण पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है़ दरअसल कृषि प्रधान क्षेत्र बांका के गेरूआ नदी में भारी पैमाने पर बालू उठाव के कारण नदी काफी गहरी हो गयी है़ पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त होने […]
