खूनी संघर्ष का गवाह रहा है बालू घाट

धोरैया : बांका जिले के आधे दर्जन बालू घाट लंबे समय से आंदोलन व खूनी संघर्ष के गवाह रहे हैं़ वर्चस्व की लड़ाई को लेकर अमरपुर प्रखंड क्षेत्र के कुल्हडि़या घाट पर दस साल से चले आ रहे विवाद में सात साल पूर्व डुमरामा के सुखडा मियां व पांच वर्ष पूर्व बासूदेवपुर के मनोज पासवान […]

धोरैया : बांका जिले के आधे दर्जन बालू घाट लंबे समय से आंदोलन व खूनी संघर्ष के गवाह रहे हैं़ वर्चस्व की लड़ाई को लेकर अमरपुर प्रखंड क्षेत्र के कुल्हडि़या घाट पर दस साल से चले आ रहे विवाद में सात साल पूर्व डुमरामा के सुखडा मियां व पांच वर्ष पूर्व बासूदेवपुर के मनोज पासवान की अपराधियों द्वारा बालू घाट पर ही हत्या कर दी गयी थी़

घटना के बाद प्रशासन द्वारा इस बालू घाट को बंद करवा दिया गया था़ वहीं 2008 में रजौन प्रखंड के सिंहनान बालू घाट पर हो रहे बालू उठाव के विरोध में किसानों द्वारा अनशन व भूख हड़ताल किया गया था़ बेलहर के साहेबगंज बालू घाट पर भी बालू उठाव को लेकर 2010 व 2011 में किसान जन संघर्ष मोरचा द्वारा प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फुंका गया था़ धोरैया के नंदगोला बालू घाट पर भी गत चार दिसंबर 2011 को अपराधियों द्वारा बालू घाट के मुंशी कमालपुर निवासी मो मुस्तफा की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी.

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