पंपिंग सेट के अंधाधुंध इस्तेमाल से जलस्तर गिरा, 90 प्रतिशत चापाकल हुए बेकार

सिंचाई के लिए खेतों में लगातार चल रहे पंपिंग सेट ने अब आम जनजीवन पर संकट खड़ा कर दिया है

गोह.

सिंचाई के लिए खेतों में लगातार चल रहे पंपिंग सेट ने अब आम जनजीवन पर संकट खड़ा कर दिया है. ग्रामीण इलाकों में जलस्तर इतनी तेजी से नीचे चला गया है कि लोगों के घरों में लगे करीब 90 प्रतिशत चापाकल पूरी तरह से सूख चुके हैं. इस कारण लोगों को पीने के पानी तक के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में गोह प्रखंड के चपरा, फाग, महदीपुर, बाजीतपुर, उपहारा, अरंडा, नीमा, मीरपुर और डुमरथू शामिल हैं. वहीं, हसपुरा प्रखंड के नरसंद, मनपुरा, डुमरा, रतनपुर, डिंडिर, बघोई, दिलावरपुर जैसे गांव भी गंभीर जलसंकट की चपेट में हैं. ग्रामीणों ने बताया कि दिन-रात बिना रुके चल रहे डीजल और बिजली से संचालित पंपिंग सेट से भूमिगत जल का अधिक दोहन हो रहा है. इसका सीधा असर घरेलू चापाकलों पर पड़ा है. अब लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है या निजी बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण

चपरा गांव की सीमा देवी बताती है कि हमारे घर का चापाकल पिछले महीनों से एक बूंद पानी नहीं दे रहा. तीन बच्चे हैं. बूढ़े सास-ससुर हैं. अब सुबह शाम दो किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ता है. वहीं, महदीपुर के रामचंद्र कहते हैं कि अगर इसी तरह पंपिंग सेट चलते रहे तो पूरा गांव जलहीन हो जायेगा.

डीएम से कार्रवाई की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गुहार लगायी है कि खेतों में चल रहे पंपिंग सेटों पर फौरन रोक लगायी जाये. साथ ही बेतरतीब सिंचाई के लिए नियमित समय और तरीके तय किये जायें, ताकि खेती और पीने के पानी में संतुलन बना रह सके. लोगों ने सरकार से इस जल संकट से निपटने के लिए गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था जैसे सार्वजनिक बोरिंग, टंकी से आपूर्ति और टैंकर व्यवस्था लागू करने की मांग की है. वहीं भू-जल स्तर की मॉनीटरिंग कर उचित जल प्रबंधन नीति लागू करने की आवश्यकता भी जतायी है.

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By SUJIT KUMAR

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