North Koel Main Canal Water : झारखंड के विभिन्न जिलों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद करीब छह दिनों तक उफान पर रही उत्तर कोयल नदी का जलस्तर अब घटने लगा है. बाढ़ का प्रभाव कम होने के बाद जल संसाधन विभाग ने शुक्रवार की सुबह से उत्तर कोयल मुख्य नहर का संचालन फिर से शुरू कर दिया.
सिंचाई के लिए बराज के राइट साइड मेन कैनाल में 700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. विभाग के अनुसार शनिवार तक नहर का संचालन उसकी क्षमता के अनुरूप शुरू कर दिया जाएगा.
बाढ़ के खतरे के कारण बंद किए गए थे कैनाल के गेट
बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए विभाग ने बराज के राइट साइड मेन कैनाल के तीनों गेट बंद कर दिए थे. वहीं बराज एवं बांध पर पानी का दबाव बढ़ने के कारण डाउन स्ट्रीम के सभी 40 गेटों को खोलकर पानी निकासी की गई.
इस दौरान सायरन बजाकर कर्मियों व आसपास के लोगों को सतर्क किया गया था. विभागीय अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे.
14 अगस्त से लगातार बनती रही बाढ़ की स्थिति
विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्तर कोयल नदी में इस वर्ष 14 अगस्त से लगातार बाढ़ की स्थिति बनती रही. उस दिन बराज से करीब 2 लाख 98 हजार 400 क्यूसेक अतिरिक्त पानी डाउन स्ट्रीम में बहाया गया था.
इसके बाद भी बीच-बीच में नदी के जलस्तर में काफी वृद्धि होती रही. इससे बराज, तटबंध और अन्य संरचनाओं पर पानी के दबाव को लेकर विभाग सतर्क रहा.
झारखंड की दर्जनों नदियों का पानी आकर गिरता है कोयल में
विदित हो कि उत्तर कोयल नदी का उद्गम स्थल झारखंड का गुमला जिला है. चतरा और हजारीबाग जिले की अमानत सहित लातेहार, लोहरदगा व पलामू जिले की बुढ़ा, औरंगा और बांकी आदि छोटी-बड़ी दर्जनों नदियों का पानी कोयल नदी में आकर गिरता है.
रांची के पठारी इलाके में बारिश से उफान पर नदी
रांची के पठारी भाग में बारिश होने पर कोयल नदी उफान पर रहती है. संवाद लिखे जाने के दौरान बराज से नीचे 27 हजार 472 क्यूसेक पानी बहाया जा रहा है.
तटबंध व बराज की सभी संरचनाएं पूरी तरह सुरक्षित
जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि उत्तर कोयल नदी में भयंकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के बावजूद तटबंध, बांध और बराज की सभी संरचनाएं सुरक्षित हैं.
किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद
जलस्तर में कमी आने के बाद शुक्रवार की सुबह से सिंचाई के लिए मुख्य नहर का संचालन शुरू कर दिया गया है. अगले दिन से नहर पर निर्भर किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है.
