वाप्कोस की लापरवाही से धान की रोपनी प्रभावित, नर्सरी मे बीचड़ा हो रहा खराब

नवीनगर डिवीजन क्षेत्र में अधूरे सीआर गेट का कार्य पूरा नहीं होने से जिले के विभिन्न प्रखंडों में सिंचाई व्यवस्था ठप

सीआर गेट का कार्य पूरा नहीं होने से जिले के विभिन्न प्रखंडों में सिंचाई व्यवस्था ठप

फोटो नंबर-105-मुख्य नहर के124 आरडी का सीआर गेट औरंगाबाद/अंबा. खरीफ मौसम किसानों के सिर पर है. धान रोपनी का उपयुक्त समय बीत रहा है. रोहिणी नक्षत्र का बीचड़ा खराब हो रहा है. सरकार के अधिकृत उत्तर कोयल नहर रिमॉडलिंग कार्य एजेंसी के कानो तक जूं तक नहीं रेंग रहा है. स्थानीय किसान अजीत कुमार, कौशल कुमार, रामकुमार सिंह, पूर्व मुखिया धनंजय कुमार सिंह आदि बताते हैं कि वाप्कोस की संवेदनहीनता से धान रोपनी का काम प्रभावित हुआ है. किसानो ने बताया कि राजकीय प्रावधानों के अनुसार पहली जुलाई से ही कोयल नहर का अनवरत संचालन शुरू होना चाहिए था. अब तक सभी वितरणियां पानी के लिए तरस रही है. इधर, पिछले 20 दिनों ने नहर का भीम बराज पानी से लबालब है. यहां तक कि अब तक लाखो क्यूसेक पानी बराज से नदी के डाउन साइड स्टीम में बहाया गया है. इधर, वाप्कोस मेन कैनाल के 107 और 124 आरडी के समीप का क्रॉस रेगुलेटर गेट कंप्लीट करने से परहेज कर रहा है. नवीनगर डिवीजन क्षेत्र में अधूरे सीआर गेट का कार्य पूरा नहीं होने से जिले के विभिन्न प्रखंडों में सिंचाई व्यवस्था ठप पड़ गयी है. हालांकि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी व कर्मी सीआर गेट को दुरुस्त करने के लिए तत्पर है. वहीं, वाप्कोस बड़ी ही धीमी गति से गेट का काम कर रहा है. ऐसे में किसानों को मानना है कि वाप्कोस को खेती गृहस्थी, किसानों व पानी के महत्व से दूर-दूर तक संबंध नहीं है. नवीनगर के स्थानीय लोगो ने बताया कि तीन जुलाई गुरुवार को ही उक्त स्थल पर सीआर गेट लगा दिया गया है. इसके बाद इधर छह दिन बीत गये अब तक गेट का अधूरा कार्य ज्यों का त्यो हैं. जानकारी के अनुसार सिर्फ प्लेटफार्म तैयार कर स्पेंडल रॉड लगाने में लेट होने से धान की खेती चौपट हो रही है.विदित हो कि शनिवार यानी पांच जुलाई को टेस्टिंग के लिए बराज से मुख्य नहर में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. इसके बाद रविवार व सोमवार को 350 क्यूसेक व मंगलवार की सुबह 550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. दोपहर में झारखंड के किसानो द्वारा हंगामा करने पर 1000 क्यूसेक छोड़ा गया है. इसी क्रम में मेन कैनाल में एक दो जगह लिकेज की सूचना पर उसी दिन शाम में पुनः 450 क्यूसेक बराज से मुख्य नहर में संचालन किया गया जाने लगा है. ऐसे में बिहार पोरसन के किसानों को धान की फसल लगाने के लिए कब तक पानी मिलेगा कहना मुश्किल है. उल्लेखनीय है कि खरीफ मौसम को देखते हुए वाप्कोस को 30 जून तक हीं नहर के सरंचनाओं को रिमॉडलिंग करने के लिए एग्रीमेंट किया गया था. इस संबंध में वाप्कोस हेड से संपर्क करने का प्रयास किया पर बात नही हुई.

क्या बताते हैं विधायक

कुटुंबा विधायक राजेश कुमार ने बताया कि धान की रोपाई करने का उपयुक्त समय बीत रहा है. किसानों को नहर से पानी की जरूरत है. इस बार अभी तक उतर कोयल नहर का रेगुलर नहीं से किसानो को काफी परेशानी हुई है. इसके लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को पत्र लिखा जायेगा.

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By Sujit kumar

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