62 वर्ष पुराने भवन में मरीजों का इलाज कर रहे थे डॉक्टर, गिरा छत का मलबा

जनता का सवाल. क्या किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार कर रहा स्वास्थ्य विभाग

दाउदनगर. शनिवार को 11 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनमोल कुमार मरीजों का इलाज कर रहे थे. चिकित्सक के दिखवाने के लिए पांच-सात की संख्या में मरीज थे. अचानक छत का निचले हिस्से का कुछ टुकड़ा उखड़ कर नीचे गिर पड़ा. चिकित्सक से लेकर मरीज तक बाल-बाल बच गये. बाद में मलबे को हटाया गया. इसी तरह प्रसव कक्ष के छत का निचले हिस्सा का कुछ टुकड़ा मई 2021 में अचानक उखड़ कर नीचे गिर पड़ा था. गनीमत रही कि जिस वक्त यह घटना हुई. इससे महज कुछ मिनट पहले प्रसव रूम में एक गर्भवती महिला का प्रसव कराया गया था. प्रसव कराने वाली महिला को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. इससे पहले टीकाकरण कक्ष के पास छत का निचला हिस्सा अचानक टूट कर गिर गया था. ऐसी स्थिति में सवाल यह उठाना शुरू हो गया है कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने का दावा करती है, तो फिर आखिर क्या कारण है कि लगभग 62 साल पुराने जर्जर हो चुके पीएचसी के भवन के नये भवन का निर्माण क्यों नहीं कराया जा रहा है. बड़ी आबादी होती है लाभान्वित : दाउदनगर-बारुण रोड पर अवस्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दाउदनगर, ओबरा व बारुण प्रखंडों के गांवों के अलावे रोहतास जिले के नासरीगंज प्रखंड के गांवों को मिलाकर करीब डेढ़ से दो लाख की आबादी लाभान्वित होती है .ओपीडी में इलाज करने के लिए अच्छी संख्या में मरीज पहुंचते हैं. नियमित टीकाकरण होता है. इतने महत्वपूर्ण पीएचसी का भवन जर्जर स्थिति में है. नये भवन के निर्माण के लिए लगभग पांच वर्षों से मांग व कवायद की जा रही है, लेकिन आज तक सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित रहा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन की छत पूरी तरह जर्जर ही चुकी है. प्लास्टर टूटकर गिरते रहता है. चिकित्सकों के लिए कोई कमरा नहीं बना है. इसके कारण ड्यूटी में रहने वाले चिकित्सकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. डॉक्टरों के लिए कमरे का अभाव: एनएचआरएम के तहत बने एक बिल्डिंग के कमरे में किसी तरह नाइट ड्यूटी करने वाले डॉक्टर रहने को मजबूर हैं. इसमें भी बरसात के दिनों में पानी टपकता रहता है. इसमें चल रहे कार्यालय के कागजातों को भी सुरक्षित रख पाना मुश्किल भरा कार्य है. 62 वर्ष पुराना है भवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण लगभग छह दशक पहले यानी 1963 में कराया गया था. बाद के वर्षों में करीब दो दशक पहले भवन के निचले हिस्से का जीर्णोद्धार कराते हुए रंग-रोगन कराया गया. लेकिन, नये भवन का निर्माण नहीं कराया गया. आज भी पुराने भवन में ही ओपीडी से लेकर मरीज के वार्ड तक संचालित है. यहां तक कि महिला वार्ड और प्रसव कक्ष की स्थिति भी सही नहीं है. लगभग पांच वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नये भवन बनवाने की मांग लगातार उठ रही है. सूत्रों से पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा इस संबंध में पत्राचार भी किया गया है. लेकिन, आज तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं देखी जा रही है. सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य केंद्रों के भवन को सुदृढ़ व व्यवस्थित बनाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. लेकिन, दाउदनगर पीएचसी इससे वंचित है. क्या कहते हैं पीएचसी प्रभारी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ यतींद्र प्रसाद ने कहा कि पीएचसी के भवन की वास्तविक स्थिति से विभागीय स्तर पर अवगत कराया जा चुका है. कुछ दिन पहले भी अवगत कराया गया है. विभागीय स्तर से जानकारी मिली है कि भवन की मरम्मति कराने की योजना स्वीकृत हुई है.

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Published by: Panchdev kumar

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