Aurangabad News : अनुमंडलीय अस्पताल दाउदनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त कथित कुव्यवस्था की शिकायतों की जांच के लिए शनिवार को सिविल सर्जन द्वारा गठित जांच टीम अस्पताल पहुंची. टीम में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रविरंजन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह और डॉ. सुनील कुमार शामिल थे. इस दौरान दाउदनगर शहर के सांसद प्रतिनिधि मो. कयूम अंसारी के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने जांच टीम से मुलाकात कर अस्पताल की समस्याओं से अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल ने सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भी जांच टीम को सौंपा.
48 घंटे की ड्यूटी पूरी नहीं करने का लगाया आरोप
प्रतिनिधिमंडल ने जांच टीम के समक्ष आरोप लगाया कि अस्पताल में पदस्थापित अधिकांश चिकित्सक सप्ताह में निर्धारित 48 घंटे की ड्यूटी पूरी नहीं कर पाते हैं. प्रतिनिधिमंडल का दावा था कि ओपीडी में भी नियमित रूप से चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं रहती है. रात के समय पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि डॉ. मो. इरफानुल जोहा के अलावा अन्य चिकित्सकों की रात्रिकालीन उपलब्धता को लेकर लगातार समस्या बनी रहती है. ऐसे में कई बार अस्पताल की व्यवस्था नर्सों और कंपाउंडरों के भरोसे रहने का आरोप लगाया गया.
रात्रि में महिला चिकित्सक की ड्यूटी नहीं होने की शिकायत
प्रतिनिधिमंडल ने महिला चिकित्सक की रात्रिकालीन इमरजेंसी ड्यूटी को लेकर भी शिकायत की. कहा गया कि महिला चिकित्सक के रात में उपलब्ध नहीं रहने से प्रसव संबंधी आपात स्थिति में मरीजों को परेशानी होती है. लैब टेक्नीशियन के भी रात्रि में उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत जांच टीम के समक्ष रखी गई.
32 स्वीकृत पद, आठ चिकित्सक ही पदस्थापित
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अनुमंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 32 पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में मात्र आठ चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. चिकित्सकों की कमी को अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने का प्रमुख कारण बताया गया. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में इसको लेकर नाराजगी बढ़ रही है.
वरीय चिकित्सक के रहते जूनियर को प्रभार देने पर सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के प्रभार को लेकर भी सवाल उठाया. कहा गया कि वरीय चिकित्सक के उपलब्ध रहने के बावजूद अपेक्षाकृत जूनियर चिकित्सक को प्रभारी बनाया गया है. इसे अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं होने का एक कारण बताया गया. प्रतिनिधिमंडल ने जांच टीम को शनिवार के एक मरीज का पुर्जा भी दिखाया, जिस पर डॉ. अमृत कुमार का नाम दर्ज था, लेकिन उनके ओपीडी में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत की गई. इसके अलावा अस्पताल की व्यवस्था से जुड़े कई अन्य मामले भी जांच टीम के समक्ष रखे गए.
व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है. यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो स्थानीय लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी. जांच टीम ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अस्पताल की व्यवस्था से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और विभाग को इससे अवगत कराते हुए समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा. मौके पर सांसद प्रतिनिधि मो. कयूम अंसारी के अलावा राजकमल कुमार सिंह, सुरेंद्र सिंह, कृष्णा प्रसाद चंद्रवंशी, संजय कुमार समेत अन्य लोग मौजूद थे.
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