औरंगाबाद में कवियों की रचनाओं से गूंजा केवाईपी सभागार, साहित्य और समाज के रिश्तों पर हुई सार्थक चर्चा

हसपुरा में जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी में साहित्य को समाज का दर्पण बताया गया. कवियों ने सामाजिक सरोकारों, प्रेम और बदलते परिवेश पर ओजस्वी रचनाएं प्रस्तुत कीं.

हसपुरा. प्रखंड मुख्यालय स्थित कुशल युवा कार्यक्रम (केवाईपी) के सभागार में जनवादी लेखक संघ के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के जिला उपाध्यक्ष निवास मंडल ने की, जबकि संचालन युवा कवि जितेंद्र कुमार 'चंचल' ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत उनकी ओजपूर्ण काव्य पंक्तियों से हुई, जिसने पूरे सभागार को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया.

साहित्य को समाज का दर्पण बताया

अध्यक्षीय संबोधन में निवास मंडल ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों से रचनाकारों में सृजनशीलता और सक्रियता बनी रहती है. उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और इस तरह के मंच नए एवं वरिष्ठ रचनाकारों के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं.

जनपक्षधर लेखन को मिलती है नई दिशा

जनवादी लेखक संघ के संयुक्त सचिव शंभू शरण सत्यार्थी ने कहा कि साहित्य के विकास और जनपक्षधर लेखन को आगे बढ़ाने में कवि गोष्ठियों की अहम भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि रचनाकारों का नियमित संवाद और काव्य पाठ साहित्यिक चेतना को समृद्ध करता है तथा समाज के समकालीन मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने लाने का माध्यम बनता है.

कवियों ने सामाजिक सरोकारों पर सुनाईं रचनाएं

कवि गोष्ठी में समुन्दर सिंह, हिमांशु राज़, असलम प्यासा, शमशाद शम्स, गुल्फराज राज, गोपेन्द्र कुमार सिन्हा 'गौतम', राजेश विचारक, डॉ. रविनंदन, अम्बुज कुमार, मुमताज़ दानिश और सुधीर सत्यम सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया. कविताओं में सामाजिक विषमता, लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, प्रकृति और बदलते सामाजिक परिवेश जैसे विषय प्रमुख रहे.

साहित्यिक आयोजनों को नियमित करने पर जोर

कार्यक्रम के अंत में सभी रचनाकारों ने इस प्रकार की साहित्यिक गोष्ठियों का नियमित आयोजन करने पर बल दिया. उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत बनाने के साथ नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं.


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By Satyadeo singh

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