दिन में डायवर्जन, रात में जर्जर मेंह पुल से गुजर रहे भारी वाहन,औरंगाबाद निगरानी तंत्र पर उठे सवाल

Aurangabad News : बारुण के जर्जर मेंह पुल पर प्रशासन के आदेशों की अनदेखी कर रात में भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है. स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है.

Aurangabad News : बारुण-नवीनगर मुख्य मार्ग के 11वें किलोमीटर पर स्थित सोन उच्च स्तरीय नहर के अत्यंत जर्जर हो चुके मेंह पुल को बचाने और संभावित बड़े हादसे को टालने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जारी कड़े दिशा-निर्देश कागजी साबित हो रहे हैं. दिन के उजाले में जहां रूट डायवर्जन का असर दिखता है, वहीं रात के अंधेरे का फायदा उठाकर भारी वाहनों का परिचालन बेरोकटोक जारी रहने की बात सामने आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, देर रात होते ही मेंह पुल से भारी मालवाहक वाहन, हाइवा और ओवरलोड डंपर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं. इससे जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा के संयुक्त आदेश की खुलेआम अवहेलना होने का आरोप लगाया जा रहा है.

17 स्थानों पर तैनाती के बावजूद कैसे पहुंच रहे भारी वाहन

प्रशासन ने इस मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए 17 रणनीतिक स्थानों पर 24 घंटे तीन पालियों में दंडाधिकारियों और पुलिस बल की तैनाती का दावा किया था. साथ ही बतरे नदी और बसन बिगहा मोड़ के समीप अस्थायी चेकपोस्ट स्थापित कर वाहनों को डायवर्ट करने का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद रात के सन्नाटे में भारी वाहनों के प्रतिबंधित पुल से होकर गुजरने की बात प्रशासनिक मुस्तैदी और स्थानीय निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई है, तो भारी वाहन चेकपोस्टों को पार कर मेंह पुल तक कैसे पहुंच रहे हैं.

तकनीकी रूप से कमजोर और जर्जर बताया गया है पुल

पथ निर्माण विभाग की तकनीकी रिपोर्ट में मेंह पुल को तकनीकी रूप से कमजोर और जर्जर बताया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, भारी वाहनों का लगातार दबाव पड़ने से पुल के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है और इससे जान-माल की क्षति की आशंका हो सकती है. इसी संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों को नवीनगर-अंबा-चतरा वैकल्पिक मार्ग से भेजने का निर्देश दिया था. हालांकि, रात्रिकाल में नियमों की अनदेखी के कारण पुल पर लगातार अतिरिक्त भार पड़ने की बात सामने आ रही है, जो किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा सकता है.

Also Read : ओबरा में भारत स्वाभिमान और पतंजलि संगठनों की बैठक, नई प्रखंड कमेटी का गठन

ग्रामीणों में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग

मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों के परिचालन से एक ओर पुल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर रात में वाहनों से उड़ने वाली राख और धूल से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने वरीय अधिकारियों से रात में गश्ती बढ़ाने और औचक निरीक्षण कराने की मांग की है. साथ ही आदेश की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.

Also Read : औरंगाबाद के ओबरा में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, बीडीओ समेत कई लोगों ने किया रक्तदान

रात्रिकालीन निगरानी बढ़ाने की उठी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल दिन के समय डायवर्जन लागू करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जर्जर पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रात में भी प्रभावी निगरानी और चेकिंग की जरूरत है. ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन को पूरी तरह रोकने और मेंह पुल की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है.

Also Read : ओबरा में भारत स्वाभिमान और पतंजलि संगठनों की बैठक, नई प्रखंड कमेटी का गठन


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By राजू रंजन

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >