गुरु पूर्णिमा आज, कल से सावन होगा शुरु

शिव आराधना के लिए विशेष मंगलदायक है सावन का सोमवार

शिव आराधना के लिए विशेष मंगलदायक है सावन का सोमवार

ग्राफिक्स भी लगाना है.

औरंगाबाद/अंबा. सनातन धर्म पंरपरा में सावन मास का बड़ा ही खास महत्व है. श्रद्धालु इस उत्तम महीने का इंतजार करते हैं. सावन के पावन महीने में भक्तों पर भगवान शंकर की कृपा बरसती है. इन भावनाओं को मन में संजोये श्रद्धालु शिव को बेल-पत्र अर्पित कर पूजन दर्शन करते हैं. वहीं संत परंपरा में आषाढ़ गुरु पूर्णिमा का विशिष्ट स्थान है. इस बार 10 जुलाई यानी गुरुवार को आषाढ़ पूर्णिमा मान्य है. इसे ही गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस दिन गुरुओं एवं महर्षि वेदव्यास जी की पूजा अर्चना धूमधाम से की जाती है. इसके ठीक दूसरे दिन 11 जुलाई शुक्रवार से पावन महीना सावन की शुरुआत होगी. इस संबध में ज्योतिर्विद डॉ हेरंब कुमार मिश्र ने बताया कि इस वर्ष सावन माह में भक्तों को चार सोमवार मिलेंगे. भगवान शिव के लिए यह महीना बहुत ही प्रिय है. यही कारण है कि इस महीना में भगवान शिव की पूजा काफी भक्तिपूर्ण भाव से की जाती है व उनका जलाभिषेक किया जाता है. साथ में जगत जननी जगदंबा की भी आराधना के लिए यह माह श्रेष्ठ बताया गया है.

रूद्राभिषेक की महिमा है अपरंपार

ज्योतिर्विद डॉ मिश्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सावन महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. ऐसे तो यह पूरा महीना भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है. इस माह का सोमवार शिव आराधना के लिए विशेष शुभदायक है. इस वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि का क्षय होने से पक्ष चौदह दिनों का होगा. वही शुक्ल पक्ष में अष्टमी तिथि की वृद्धि हो जाने से शुक्लपक्ष 16 दिनों का रहेगा. पक्ष में तीन शुक्रवार पड़ेंगे जो शुभ फलकारक है. उन्होंने बताया कि सावन महीना में भगवान शंकर पर जल और बेलपत्र अर्पण करने से सुख, शांति, समृद्धि आती है. शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान शिव को सबसे प्रिय जल है. पुराणों के अनुसार इसी सावन माह में समुद्र मंथन से निकले हुए विष का पान कर भगवान शिव ने उसे अपने गले म���ं स्थापित किया था. उन्होंने बताया कि सावन में रुद्राभिषेक की भी महिमा अपरंपार है. सावन मास की शिवरात्रि 23 जुलाई बुधवार को होगी. शिवरात्रि के दिन शिव पूजन करने से अन्यतम फल प्राप्त होता है. 16 जुलाई को रात्रिशेष 4 बजकर 25 मिनट पर कर्क राशि की सूर्य संक्रांति होने के साथ ही सूर्य दक्षिणायन हो जायेंगे .20 जुलाई रविवार को दिन में 4: 43 मिनट पर सूर्य का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश होगा. इसमें स्त्री-पुरुष, चंद्र-चंद्र योग, चातक वाहन, चंडा नाड़ी स्वामी शनि होने से तेज हवा के साथ अच्छी वर्षा की संभावना है.

सावन माह से ही पर्व त्यौहार की होती है शुरुआत

ज्योतिर्विद ने बताया कि सनातनवर्षीय वर्ष में आषाढ़ के बाद सावन से ही पर्व त्योहार की शुरुआत होती है. इस माह में 26 जुलाई शनिवार को स्वामी करपात्री जी की जयंती धूमधाम से मनायी जायेगी. इसके बाद 29 जुलाई को नाग पंचमी के दिन सांपों के प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट करते हुए दूध और लावा का भोग लगाकर उनकी पूजा की जायेगी. यह सनातन धर्म की उदात्त परंपरा है. 31 जुलाई सावन शुक्ल पक्ष सप्तमी को महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनायी जायेगी. नौ अगस्त शनिवार को वैदिक रीति से श्रावणी उपाकर्म किये जायेंगे. रक्षाबंधन इसी दिन मनाया जायेगा. संस्कृत दिवस समारोह के आयोजन भी इसी दिन होंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Sujit kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >