औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे उत्साह और भक्तिमय माहौल के साथ मनाया गया. इस पावन अवसर पर प्रखंड क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक उमगा पर्वत पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और मन्नतें मांगीं. पर्वत पर स्थित माता उमंगेश्वरी मंदिर, सहस्त्र शिवलिंगी मंदिर, भगवान गणेश मंदिर तथा प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.
मंदिर के मुख्य पुजारियों-विष्णु पाठक, दिलीप पाठक और नीरज पाठक उर्फ राजू पाठक-द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई, जिसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
पूर्णाडीह गांव में हुआ विशेष धार्मिक आयोजन
इसके साथ ही, पूर्णाडीह गांव में उमंगेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी बालमुकुंद पाठक के नेतृत्व में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य पुजारी ने गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और मानव जीवन में गुरु के अद्वितीय महत्व को विस्तार से समझाया.
उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा का यह पर्व प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की अंतिम पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. सनातन हिंदू संस्कृति में गुरु या शिक्षक को हमेशा भगवान के समान दर्जा दिया गया है.
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य के जीवन में कोई सच्चा मार्गदर्शक या गुरु न हो, तो जीवन दिशाहीन और रास्ता विहीन हो जाता है. 'गु' शब्द का अर्थ 'अंधकार' और 'रु' का अर्थ 'ज्ञान' होता है, अर्थात जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है, वही सच्चा गुरु कहलाता है.
संस्कार और नैतिकता के सृजक होते हैं गुरु
मुख्य पुजारी ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें हमेशा अपने गुरुओं का आदर और सम्मान करना चाहिए, चाहे वे हमारे घर के बड़े हों या बाहर के शिक्षाप्रद शिक्षक. गुरु केवल किताबी शिक्षा प्रदान करने के लिए नहीं होते, बल्कि वे हमारे जीवन में संस्कार, नैतिकता और सकारात्मक सोच का भी सृजन करते हैं. इस आयोजन से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और धार्मिक माहौल बना रहा.
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