Daudnagar Sub-divisional Hospital : औरंगाबाद जिले का दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल उद्घाटन के करीब 11 वर्ष बाद भी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और जरूरी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में लाखों मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है.
11 साल बाद भी अधूरी स्वास्थ्य व्यवस्था
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल उद्घाटन के लगभग 11 वर्ष बाद भी अपेक्षित सुविधाओं से वंचित है. हाल के दिनों में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम प्रभा का तबादला हो गया है, जबकि डॉ. विकास प्रसाद और डॉ. रवि रेशव भी एसआर के लिए विरमित हो चुके हैं. इससे अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या लगातार घटती जा रही है और मरीजों की परेशानी बढ़ गई है.
12 से 15 लाख आबादी इस अस्पताल पर निर्भर
75 बेड वाले इस अनुमंडलीय अस्पताल से दाउदनगर अनुमंडल के चारों प्रखंडों के अलावा अरवल जिले के कलेर और मेहंदिया तथा रोहतास जिले के नासरीगंज सहित आसपास के क्षेत्रों की करीब 12 से 15 लाख आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जुड़ी हुई है. अस्पताल शुरू होने के समय लोगों को उम्मीद थी कि स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद अब तक पूरी नहीं हो सकी है.
32 स्वीकृत पद, लेकिन केवल 12 डॉक्टर कार्यरत
अस्पताल में उपाधीक्षक सहित चिकित्सकों के कुल 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 12 चिकित्सक ही कार्यरत हैं. इनमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, चार सामान्य चिकित्सक (दो महिला चिकित्सकों सहित), एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक दंत चिकित्सक और दो आयुष चिकित्सक शामिल हैं. सामान्य चिकित्सकों में से एक प्रभारी उपाधीक्षक का दायित्व भी निभा रहे हैं.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से बढ़ रही परेशानी
अस्पताल में हड्डी रोग, ईएनटी, शिशु रोग, चर्म रोग, हृदय रोग, नेत्र रोग और रेडियोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है. ऐसे में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पतालों में रेफर करना मजबूरी बन गया है.
स्वास्थ्यकर्मियों के आधे से अधिक पद खाली
मानव संसाधन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है. अस्पताल में कुल 107 पद स्वीकृत हैं, लेकिन आधे से भी कम पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं. स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, एक्स-रे तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, फिजियोथैरेपिस्ट, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन समेत कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त हैं. नियमित उपाधीक्षक का पद भी खाली है.
मरीजों को बड़े शहरों का करना पड़ रहा रुख
विशेषज्ञ चिकित्सकों और पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को समय पर बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है. गंभीर मामलों में उन्हें औरंगाबाद सदर, गया या पटना रेफर किया जाता है, जिससे इलाज में देरी के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है.
स्थानीय लोगों ने सरकार से की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में सभी स्वीकृत पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए. साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए, ताकि लाखों लोगों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण और सुलभ इलाज मिल सके.
क्या है उम्मीद
लोगों को उम्मीद है कि राज्य सरकार दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में रिक्त पदों को भरने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ठोस कदम उठाएगी.
