जिलेभर के सीओ हड़ताल पर, ठप पड़े दाखिल-खारिज व भूमि से जुड़े कार्य

AURANGABAD NEWS.बिहार राजस्व सेवा संघ के आह्वान पर जिलेभर के सभी अंचलाधिकारी दो फरवरी से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गये हैं. इस कारण दाखिल-खारिज, म्यूटेशन अपील, भूमि विवाद निबटारा, सरकारी एवं निजी भवनों के लिए एनओसी, ऑनलाइन जमाबंदी सुधार सहित सभी प्रमुख राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गये हैं.

दो फरवरी से सामूहिक अवकाश पर हैं अंचलाधिकारी, मांगों के समर्थन में बुलंद की आवाजप्रतिनिधि, औरंगाबाद शहरबिहार राजस्व सेवा संघ के आह्वान पर जिलेभर के सभी अंचलाधिकारी दो फरवरी से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गये हैं. इस कारण दाखिल-खारिज, म्यूटेशन अपील, भूमि विवाद निबटारा, सरकारी एवं निजी भवनों के लिए एनओसी, ऑनलाइन जमाबंदी सुधार सहित सभी प्रमुख राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गये हैं. संघ का कहना है कि मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गये कुछ निर्णय बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010, सेवा में प्रवेश की निर्धारित शर्तों और पटना उच्च न्यायालय के आदेशों के प्रतिकूल हैं. इन निर्णयों से राजस्व अधिकारियों के पदोन्नति ढांचे, कैडर संरचना और सेवा-सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. अंचलाधिकारियों का कहना है कि मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन पहल नहीं की गयी. लिहाजा हम सभी को सामूहिक अवकाश पर जाना पड़ा.

ये है अंचलाधिकारियों की प्रमुख मांगें

मंत्रिपरिषद के निर्णय संख्या 23 व 30 को तत्काल वापस लेने, बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 की मूल भावना के अनुरूप ही पदस्थापन और पदोन्नति की प्रक्रिया लागू करने, पटना उच्च न्यायालय द्वारा सीडब्ल्यूजेसी नंबर 5902/2024 में पारित आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने, भूमि सुधार उप समाहर्ता जैसे संवर्गीय व पदोन्नति-आधारित पदों के पदनाम परिवर्तन को रद्द करने, राजस्व सेवा अधिकारियों की संवर्गीय संरचना और पदोन्नति अवसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने आदि मांग अंचलाधिकारियों की है.

सामूहिक अवकाश से आमलोगों को परेशानी

अंचल कार्यालयों में कामकाज ठप होने से आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. जमीन की खरीद-फरोख्त, दाखिल-खारिज, पारिवारिक बंटवारा, जमीन विवाद, नक्शा सुधार और एनओसी जैसे आवश्यक कार्य अटक गये हैं. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग बिना काम के लौटने को मजबूर हैं. संघ ने कहा है कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन जारी रहेगा. हड़ताल के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक अथवा विधिक स्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.

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