Aurangabad News : उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना के तहत मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज से शनिवार को मुख्य नहर में 1024 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें 130 क्यूसेक पानी अंबा डिवीजन में उपयोग हो रहा है, जबकि शेष पानी औरंगाबाद डिवीजन क्षेत्र की ओर प्रवाहित किया जा रहा है. हालांकि, नहर पर अधूरे क्रॉस रेगुलेटर (सीआर) और हेड रेगुलेटर (एचआर) गेट सिंचाई व्यवस्था में बड़ी बाधा बने हुए हैं, जिससे खरीफ सीजन में किसानों की चिंता बढ़ गई है.
अधूरे गेटों से प्रभावित हो रहा जल वितरण
जल संसाधन विभाग ने खरीफ फसलों की सिंचाई को देखते हुए नहर में पानी का प्रवाह बढ़ाया है, लेकिन मुख्य नहर एवं शाखा नहरों पर लगे कई सीआर और एचआर गेट पूरी तरह तैयार नहीं होने के कारण पानी का समुचित संचालन नहीं हो पा रहा है. कई स्थानों पर गेट ऊपर-नीचे नहीं हो रहे हैं, जिससे जल वितरण प्रभावित हो रहा है.
रोपाई के समय पानी का इंतजार कर रहे किसान
प्रखंड के उत्तरी क्षेत्र में अधिकांश किसानों की धान की नर्सरी तैयार है और पुनर्वसु नक्षत्र में रोपाई का समय भी गुजर रहा है. चार-पांच दिनों की बारिश के बावजूद खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है. किसान उत्तर कोयल नहर के पानी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है.
जून तक पूरे होने थे गेट, अब भी अधूरे
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की अधिकृत एजेंसी वाप्कोस को जून तक सभी सीआर और एचआर गेट तैयार करने थे, लेकिन अब भी कई गेट अधूरे हैं. नवीनगर डिवीजन के 143 आरडी, अंबा डिवीजन के 155 आरडी (महुअरी नहर), 168.50 आरडी (बसडीहा नहर) और 224 आरडी समेत कई स्थानों पर गेटों के संचालन में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं.
किसानों ने पूर्व सांसद से लगाई गुहार
रामपुर के रामचंद्र सिंह, मृत्युंजय सिंह, रसलपुर के शिवनाथ पांडेय, लवकांत सिन्हा, सुही के सुदर्शन सिंह, समदा के अरविंद पांडेय और कुटुंबा के आजम इमाम समेत कई किसानों ने पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह से हस्तक्षेप करने और सरकार के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई कराने की मांग की है.
कार्य एजेंसी को भेजा गया है सुधार पत्र
उत्तर कोयल परियोजना के मुख्य अभियंता अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि भीम बराज में पर्याप्त जल भंडारण है और शनिवार को 1024 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि बिहार क्षेत्र की सिंचाई के लिए लगभग 700 क्यूसेक पानी पर्याप्त है. उन्होंने स्वीकार किया कि कर्मा नहर को छोड़ अधिकांश स्थानों पर गेट पूरी तरह कार्यशील नहीं हैं. इस संबंध में कार्यदायी एजेंसी वाप्कोस को आवश्यक सुधार के लिए पत्र भेजा गया है.
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