औरंगाबाद कार्यालय.
शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग से बहाल कर्मियों की नौकरी खतरे में आ अयी है. 31 मार्च के बाद एक ही साथ सभी कर्मियों की सेवा समाप्त की जा सकती है. हालांकि, इस संबंध में विभाग द्वारा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है और नहीं विभाग के अधिकारी स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहने को तैयार है. प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले आठ फरवरी को वीसी के माध्यम से आयोजित बैठक में शिक्षा विभाग के एसीएस डॉ एस सिद्धार्थ ने स्पष्ट तौर पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से बहाल कर्मियों से 31 मार्च के बाद कार्य नहीं लेने का निर्देश दिया है. जानकारी के अनुसार एसीएस डॉ सिद्धार्थ ने बैठक में आउटसोर्सिंग आधारित व्यवस्था को जापानी व्यवस्था बताते हुए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को 31 मार्च के बाद टर्मिनेट करने का निर्देश दिया है. एसीएस के निर्देश के बाद आउटसोर्सिंग के माध्यम से बहाल कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी है. हालांकि बैठक के 10 दिन जाने के बाद भी अब तक विभाग द्वारा इस संबंध में किसी तरह का पत्र जारी नहीं किया गया है. बैठक में दिए गए निर्देश के अनुसार यदि सभी कर्मचारी हटाये जाते हैं तो एक ओर कर्मचारियों के रोजी रोजगार पर असर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग मैं चल रहा है कार्यों पर भी असर पड़ सकता है.केके पाठक के कार्यकाल में हुई थी आउटसोर्सिंग कर्मियों की बहाली
शिक्षा विभाग में तकरीबन पांच वर्ष पूर्व से कंप्यूटर ऑपरेटर आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गये थे. इसके उपरांत पिछले वर्ष उस समय के निवर्तमान अपर मुख्य सचिव के के पाठक के कार्यकाल में विभिन्न पदों पर आउटसोर्सिंग कर्मियों की बहाली की गई. जिन पदों पर आउटसोर्सिंग कर्मियों की बहाली की गई है उनमें कंप्यूटर ऑपरेटर के अलावे जिला स्तर पर डीपीएम, प्रोगामर, प्रखंड स्तर पर बीपीएम व बीआरपी आदि शामिल है. प्राप्त जानकारी के अनुसार औरंगाबाद जिला अंतर्गत आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर 64 कर्मी कार्यरत है. यदि एक ही साथ सभी को सेवा समाप्त किया जाता है तो इनके रोजी रोजगार पर असर पड़ेगा.दूसरे जगह पर कार्य छोड़कर शिक्षा विभाग में बहाल हुए हैं कर्मी
दुविधा में दोनों गये माया मिली ना राम. यह पंक्ति शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत कर्मियों पर चरितार्थ साबित हो रही है. हालांकि अब तक आउटसोर्सिंग के तहत बहाल कोई भी कर्मी खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है. परंतु विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी कर्मी ऑनलाइन मोड में बैठक कर अपनी नौकरी बचाने को लेकर चर्चा कर रहे हैं. कोई सरकार से अपनी मांग रखने की बात कर रहा है, तो कोई आंदोलन करने की. कई कर्मी न्यायालय की शरण में जाने के लिए भी सोच रहे हैं. आखिर नौकरी जाने की चिंता हो भी क्यों नहीं जब वह दूसरे जगह से अपनी नौकरी छोड़कर शिक्षा विभाग में सरकारी के नाम पर योगदान किया और महज छह माह एवं एक वर्ष बाद ही उनकी नौकरी समाप्त करने की चर्चा हो रही हो. प्राप्त जानकारी के अनुसार डीपीएम एवं बीपीएम की बहाली में बीटेक योग्यता रखने वाले तथा बीआरपी की बहाली डीएलएड या बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को की गई थी. इसके साथ ही अभ्यर्थियों से दो वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक का कार्य अनुभव मांगा गया था. इससे स्पष्ट है कि सभी कर्मी कहीं ना कहीं कार्यरत थे और वह पूर्व के कार्य को छोड़कर सरकारी के नाम पर शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग के तहत बहाल हुए हैं.क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार एवं स्थापना डीपीओ दयाशंकर प्रसाद से पूछने पर उन्होंने कुछ भी बताने से इन्कार किया. यह पूछे जाने पर की संबंध में कोई निर्देश प्राप्त है, तो अधिकारी ने बताया कि किसी तरह का पत्र प्राप्त नहीं है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
