औरंगाबाद/कुटुंबा.
हैलो, मैं बिहार बोर्ड पटना के परीक्षा विभाग से बोल रहा हूं. आपका कैंडीडेट इंटर बोर्ड के फाइनल परीक्षा में अमुक विषय में फेल कर रहा है. अगर उसे आप इंटर पास कराना चाहते हैं, तो तुरंत अकाउंट में रुपये पेमेंट करने होंगे. इस तरह के फर्जी कॉल आने से इन दिनों परीक्षार्थी के परिजन हैरान है. इंटर परीक्षा के उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन शुरू होने के पहले से ही बच्चों के अभिभावक के मोबाइल पर लगातार फोन आ रहे हैं. जिनके बच्चों ने इस वर्ष इंटर की फाइनल परीक्षा दी है, ऐसी कॉल आने से उनके अभिभावक समझ नहीं पा रहे है कि आखिर उनका फोन नंबर कॉल करने वाले फर्जी कर्मियों को कहां से और कैसे मिल जाता है. फोन करने के क्रम में जालसाज परीक्षार्थियों के आधार नंबर के साथ माता-पिता व संस्था का नाम तथा सब्जेक्टिव बता देते हैं. ऐसे में बच्चे और उनके भोले-भाले अभिभावकों को साइबर अपराधी के झांसे में आना स्वाभाविक है. हालांकि, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे कॉल अगर मोबाइल पर आए तो अभिभावकों को पूरी तरह से सतर्क हो जाना चाहिए. इधर, बुधवार यानी 18 फरवरी को 12:15 बजे माली थाना क्षेत्र के बैरंवा लोकनाथ निवासी सुनील कुमार पांडेय के मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आया कि मैं बोर्ड ऑफिस से बोल रहा हूं. मुझे निधि कुमारी से बात करना है. उसे इंटर परीक्षा में वायो और कमेस्ट्री विषय में क्रॉस लग गया है. उसे पास कराना चाहते हैं तो सैकेंड डिवीजन के लिए 8500 और फर्स्ट डिवीजन के लिए 15 हजार रुपये तुरंत अकाउंट में पेमेंट कर दीजिए. फोन करने वाला व्यक्ति अपना नाम नहीं बताया पर बिहार बोर्ड के परीक्षा विभाग का स्टाफ बताया. इतना तक कहा कि फोन पर बात करने के दौरान निधि को महिला कॉलेज मुड़िला अंबा की छात्रा भी बता दिया. हालंकि, उसके अभिभावक ने जालसाज को कहा कि अभी इंटर का मूल्यांकन शुरू नहीं हुआ है,फिर भी ठग उसे झांसे में लेने का हर संभव प्रयास किया.उक्त छात्रा ने फार्म भरने और एडमिशन के दौरान अपने चाचा को मोबाइल नंबर इंट्री कराई थी. इसी क्रम में उन्होंने प्रभात खबर की टीम से संपर्क किया. इसके पश्चात मीडिया कर्मियो ने इसकी जानकारी फोन से जिला शिक्षा कार्यालय औरंगाबाद को दी. विभागीय अधिकारियों ने सावधान रहने की नसीहत दी है.इस तरह का कॉल एक दो व्यक्ति को नहीं बल्कि आये दिन दर्जनों व्यक्ति के मोबाइल पर आ रहे है.मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही सक्रीय हो गये साइबर अपराधी
इंटर के मूल्यांकन शुरू होने से पहले से हीं साइबर अपराधी पूरी तरह से सक्रीय हो गये हैं. जालसाज सुदूर ग्रामीण इलाके के भोले-भाले अभिभावक को अपना निशाना बना रहें है. स्थिति ऐसी है कि बोर्ड के फर्जी कॉल आने से अभिभावक की परेशानी बढ जा रही है. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या करें. आश्चर्य की बात तो यह है कि साइबर अपराधी परीक्षार्थियों का रौल कोड व रौल नंबर के साथ-साथ अभिभावक का फोन नबंर कहां से व कैसे उपलब्ध कर ले रहें हैं.ऐसे में ठगी के शिकार होने से अपना आप को बचाना सहज प्रतीत नहीं हो रहा है.फर्स्ट डिवीजन के चक्कर में लोग अबतक हजारो रूपये गवां चुके हैं, फिर भी मीडिया कर्मियों से बताने से परहेज कर रहें हैं. फोन करने वाला जालसाज कभी अपने आप को बोर्ड का स्टाफ कभी डाटा इंट्री ऑपरेटर तो कभी परीक्षक बता रहा है. ऐसे बुद्धिजीवियों का मानना है कि जितनी परेशानी साइबर अपराधी की सक्रियता से नहीं है उससे अधिक शासन तंत्र की निष्क्रियता है. अगर मामले में कार्रवाई होती तो अभिभावको के मोबाइल पर इस तरह का काॅल नहीं आता. ऐसे प्रभात खबर अखबार ने परीक्षार्थी के अभिभावको को सुझाव दिया है कि इस तरह के फोन से आप सचेत और सुरक्षित रहें अन्यथा पाकेट खाली हो सकता है.पैरवी की गुंजाइश नहीं
बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित मैट्रिक व इंटर के मूल्यांकन से लेकर रिजल्ट तक पैरवी की गुंजाइश नहीं रहती है. आसंर सीट पूरी तरह से वारकोडेड रहता है. परीक्षा समाप्त होने के पश्चात आसंर सीट से रौल कोड रौल नंबर व परीक्षार्थी का फोटो हटाकर अलग से स्टीकर लगा दिया जाता है. यहां तक की किस स्टुडेंट की कांपी है, इसकी भनक परीक्षकों को भी नहीं लगती है. मूल्यांकन के क्रम में हीं बोर्ड को ऑनलाइन मार्क्स पेस्ट कर दिया जाता है. इसके लिए अलग से मेकर चेकर व सुपरवाईजर लगाये जाते है. मेकर मूल्यांकित आंसर सीटो का मार्क्स इंट्री करते है. इसके बाद आसंर सीट चेकर के टेबल पर ऑनलाइन करने के लिए दिया जाता है. दोनों के बीच का मार्क्स का मिश मैच करने पर सुपरवाईजर मिलान कर उसे सुधार कर लेते है. कहीं से फर्जीवाड़ा का रास्ता नहीं दिखता है.क्या बताते हैं अफसर
डीपीओ दयाशंकर सिंह ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति के मोबाइल पर इस तरह का कॉल आये, तो उसके झांसे में आकर पैसा नहीं डालिए. तुरंत इसकी शिकायत पुलिस को करें. साइबर अपराधी स्कूल के कंप्यूटर व कैफे के डाटा हैक कर लोगो से ठगी कर रहे हैं. बिहार विद्यालय बोर्ड इस तरह का फोन किसी को नहीं करा रहा है.ये साईबर अपराधी है जो फर्जीवाड़ा कर ठगी करने का प्रयास कर रहें है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
